PM Modi Japan Visit : भारतमें आइए, विश्वके लिये उत्पादन कीजिए !

  • जापान यात्रामें प्रधानमंत्री मोदी का जापानी संस्थानों से आह्वान

  • वैश्विक विकास में भारतका १८ प्रतिशत योगदान ! – प्रधानमंत्री

  • भारत-अमेरिका कर युद्ध की पृष्ठभूमि पर मोदी की महत्त्वपूर्ण यात्रा

टोकियो (जापान) – आज विश्व केवल भारत की ओर नहीं देख रहा है, अपितु भारत पर विश्वास भी कर रहा है । मैं आपसे आग्रह करता हूं कि ‘आप आइए, मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड कीजिए’ (भारतमें आकर विश्वके लिये उत्पादन कीजिए), ऐसा महत्त्वपूर्ण वक्तव्य प्रधानमंत्री मोदी ने ‘भारत-जापान आर्थिक मंच’ को सम्बोधित करते हुए किया । वे वर्तमान में जापान की यात्रा पर हैं । भारत-अमेरिका के मध्य कर युद्ध की पृष्ठभूमि पर प्रधानमंत्री द्वारा जापानी व्यवसायियों को दिया गया यह निमंत्रण महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है । प्रधानमंत्री ने कहा कि, मेट्रो से लेकर ‘मैन्युफैक्चरिंग’ (उत्पादन) तक प्रत्येक क्षेत्रमें भारत-जापान साझेदारी विश्वासका प्रतीक बन गई है । जापानी संस्थानों ने भारत में ४० अरब डालर से अधिक (३ लाख ५२ सहस्र करोड रूपयों से अधिक) निवेश किया है तथा गत २ वर्षों में १३ अरब डालर का (१ लाख १४ सहस्र करोड रूपयों से अधिक) निजी निवेश भी हुआ है । इस अवसरपर जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने कहा कि, भारतीय प्रतिभा एवं जापानी तकनीक एक दूसरे के हित के लिये बनी हैं ।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की अर्थव्यवस्था के विषय में बताये महत्त्वपूर्ण सूत्र !

१. आज भारत में राजनैतिक एवं आर्थिक स्थिरता है । भारत विश्व की सर्वाधिक तीव्रगति से बढने वाली बडी अर्थव्यवस्था है एवं शीघ्र ही वह विश्व की तृतीय सर्वाधिक बडी अर्थव्यवस्था बनने वाली है ।

२. ‘जापान बैंक’ के अनुसार भारत सर्वाधिक आशाजनक स्थान है, वहीं जापान की व्यवसायिक संस्था ‘जापान एक्स्टर्नल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन’ कहती है कि, विश्वके ८० प्रतिशत संस्थानों की भारत में विस्तार करने की इच्छा है । ७५ प्रतिशत  अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को भारत में लाभ हो रहा है ।

३. वैश्विक विकास में भारत १८ प्रतिशत योगदान कर रहा है । भारत में व्यवसाय करने की सरलता पर बल दिया गया है । रक्षा तथा अंतरिक्ष जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिये भी खोला गया है ।

४. जापान ‘टेक पावरहाउस’ (तंत्रज्ञानका शक्तिकेंद्र) है, वहीं भारत ‘टैलेंट पावरहाउस’ (प्रतिभाका शक्तिकेंद्र) है । जापानकी तकनीक एवं भारतकी प्रतिभा मिलकर इस शतक की ‘टेक क्रांति’ (तंत्रज्ञानकी क्रांति) का नेतृत्व कर सकते हैं ।