Adv Ashwini Upadhyay Visit : हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए आश्रम में चल रहा कार्य प्रेरणादायी ! – अधिवक्ता उपाध्याय
सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्यायजी की रामनाथी, गोवा स्थित सनातन आश्रम को सदिच्छा भेंट !
सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्यायजी की रामनाथी, गोवा स्थित सनातन आश्रम को सदिच्छा भेंट !
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के पेशेवर श्रीमान अभय निगम ने हाल ही में गोवा के रामनाथी स्थित सनातन आश्रम का सद्भावना दौरा किया। दौरे के समय सनातन साधक श्री अभिजीत सावंत ने उन्हें आश्रम में चल रहे राष्ट्र और धर्म के कार्यों की जानकारी दी।
भारत स्वतंत्र होने के उपरांत केंद्र में सत्तारूढ कांग्रेस की ऐसी राष्ट्रविघातक विचारधारा के कारण ही उसने गोवा मुक्त करने में टालम-टोल की थी, यदि ऐसा कहा जाए, तो इस में चूक कैसी !
सर्वोच्च न्यायालय के प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ अधिवक्ता (श्री.) अश्विनी उपाध्यायजी ने गुडी पाडवा (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) के मंगलपर्व पर ९ अप्रैल को सनातन आश्रम की सदिच्छा भेंट ली ।
समुद्रकिनारे (बीच) एवं ‘पार्टी लाईफ’ (प्रीतिभोजन करना) के परे जाकर गोवा के पर्यटन को व्यापक स्वरूप देना आवश्यक है । इसके लिए पर्यटन क्षेत्र से संबंधित संस्था, आस्थापनों के साथ जनता की मानसिकता में भी परिवर्तन होने के लिए प्रयत्न करने पडेंगे ।
भोपाल के निर्माणकार्य व्यवसायी श्री. रघुनंदन सिंह राजपूत ने कुछ दिन पूर्व रामनाथी, गोवा के सनातन के आश्रम में सद्भावना भेंट की । इस अवसर पर उनके साथ उनके परिजन तथा मित्र उपस्थित थे ।
आश्रम में पूर्णकालीन साधना करनेवाले साधक अत्यंत अनुशासन एवं निःस्वार्थ भाव से रसोई, ‘सनातन प्रभात’ नियतकालिक, ग्रंथ, तांत्रिक सेवाएं, हिन्दू धर्म का प्रचार-प्रसार ऐसी अनेक सेवाएं करते हैं । – श्री. रघुनंदन सिंह राजपूत
गोवा में पुर्तगालियों ने ४५० वर्ष राज्य करने के उपरांत भी गोवा में हमारे पूर्वजों ने भारतीय संस्कृति को संरक्षित रखा है । यह गोवा की विशेषता है ।
महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय का समग्र कार्य देखकर उन्होंने अपना मनोगत व्यक्त करते हुए कहा, ‘गुरुदेवजी (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी) आज के समय के लिए आवश्यक कार्य ही कर रहे हैं, जिसकी आज की पीढी के लिए बहुत आवश्यकता है ।’
मंदिर में साक्षात भगवान का वास होने से उसे ‘देवस्थान’ कहा जाता है । हे देवताभक्तों, मंदिर हिन्दुओं की उपासना के केंद्र बनने चाहिएं । – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी