
रामनाथी, २१ जून (संवाददाता) – देश में बडी संख्या में लव जिहाद की घटनाएं हो रही हैं । इसके लिए धर्मांध युवक स्वयं को हिन्दू बताकर हिन्दू लडकियों से निकटता बढाते हैं तथा उसके उपरांत एक दिन उनके साथ विवाह करते हैं । उस लडकी का पहले ही वशीकरण किया होता है, उसके कारण वह उसे छोडकर नहीं जाती तथा वह जैसा बताएगा, वैसा करने लगती है । लडकी ने वैसा नहीं किया, तो उसके साथ बहुत मारपीट की जाती है । ऐसा होते-होते एक दिन उसका संपूर्ण जीवन ही ध्वस्त हो जाता है । इस प्रकार ‘लव जिहाद’ में फंसी लडकियों को उससे छुडाने के लिए हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों को सतर्कता समितियों का गठन करना चाहिए, ऐसा मत गोवा के मुंबई उच्च न्यायालय की खंडपीठ में कार्यरत अधिवक्ता शैलेश कुलकर्णी ने व्यक्त किया । ‘वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव’ के छठे दिन (२१.६.२०२३ को) वे ऐसा बोल रहे थे ।

इस अवसर पर अधिवक्ता शैलेश कुलकर्णी ने लव जिहाद के षड्यंत्र की शिकार हुई गोवा की एक हिन्दू लडकी को उन्होंने कैसे छुडाया, इसका अनुभव कथन किया । उन्होंने कहा, ‘‘गोवा की एक हिन्दू लडकी पुणे में नौकरी करती थी, उस समय एक धर्मांध युवक ने स्वयं को हिन्दू बताकर उसके साथ परिचय बढाया तथा उसके उपरांत उसके साथ विवाह किया । उसके उपरांत वह मुसलमान बनने के लिए उस पर दबाव डालने लगा । उसके लिए उसने उस लडकी के साथ बहुत मारपीट की । कुछ दिन उपरांत उस लडकी ने हिजाब, बुर्का एवं काले कपडे पहनने आरंभ किया । धर्मांध ने उसे ‘तुमने धर्मांतरण नहीं किया, तो मैं तुम्हें मार डालूंगा’, ऐसी धमकी दी । उसने अपनी एक सखी के माध्यम से अपने पिता को उसके संकट में होने का संदेश (मैसेज) भेजा । अर्थात उसके पिता ने यह प्रकरण मुझे सौंपा । उसके उपरांत मैं उसके पिता के साथ पुणे के कोथरूड में गया । पीडिता के घर जाने से पूर्व हमने पुणे के बजरंग दल एवं विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं को इस विषय में सूचित किया । उन्होंने हमारी सहायता के लिए २५० कार्यकर्ता दिए । इसके साथ ही हमने पहले से ही पुणे पुलिस को सूचित किया था; इसलिए वे भी हमारे साथ थे । आरंभ में लडकी ने हमारे साथ आना अस्वीकार किया; परंतु अंततः हम उसे लेकर स्थानीय पुलिस थाने में गए । वहां उसे समझाने पर उसने पुलिस को सभी जानकारी दी । लडकी ने लिखित स्पष्टीकरण में ‘मैं स्वयं उसके साथ गई हूं’, ऐसा लिखा तथा उस धर्मांध के विरुद्ध किसी प्रकार की शिकायत देना अस्वीकार किया । इससे ‘द केरला स्टोरी’ हमारे घरतक पहुंच गई है’, यह स्पष्ट होता है । इसे रोकने के लिए हम ‘पापा, प्लीज हेल्प मी’ (पिताजी, मेरी सहायता कीजिए), ऐसा अभियान भी चला सकते हैं ।’’
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