परीक्षा का बहिष्कार करनेवाली हिजाब समर्थक छात्राओं को पुन: परीक्षा का अवसर नहीं मिलेगा – कर्नाटक सरकार
कर्नाटक उच्च न्यायालय के निर्णय के पश्चात भी मुस्लिम छात्राओं ने बिना हिजाब पहने स्कूल आने से इनकार कर दिया है ।
कर्नाटक उच्च न्यायालय के निर्णय के पश्चात भी मुस्लिम छात्राओं ने बिना हिजाब पहने स्कूल आने से इनकार कर दिया है ।
आर्थिक बजट प्रस्तुत करने के लिए मुख्यमंत्री ने गोबर से बने बक्से का प्रयोग करना यह देश की पहली ही घटना है ।
युक्रेन की ओर से उनको ‘मानवी ढाल’ के रुप में प्रयोग किया जा रहा है, ऐसा आरोप रशिया ने किया था ।
त्रिपुरा उच्च न्यायालय का अगरतला महानगरपालिका को आदेश
फरवरी एवं मार्च में पंजाब, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर एवं गोवा, इन ५ राज्यों में चुनाव होनेवाले हैं । इन चुनावों की पार्श्वभूमिपर विविध राजकीय पक्षों द्वारा सदैव की भांति जनता को प्रलोभन देना, सहुलियतों की घोषणा करना, हमने ही विकासकार्य किया’, ऐसी ढींगें मारना, एकदूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करना,
हमारा धर्म और संस्कृति बचेगी तो देश बचेगा; क्योंकि यदि कट्टरता बढती है, तो पुलिस व्यवस्था, प्रशासन, न्यायपालिका समेत पूरा देश संकट में पड जाएगा । देश की संप्रभुता के लिए वास्तव में यह एक बडी चुनौती है ।
ऐसा आदेश न्यायालय को क्यों देना पडता है ? अवैध निर्माण कार्य होने तक सरकारी तंत्र सो रहे थे क्या ?
कोप्पा जनपद के बालागडी गांव में स्थित सरकारी महाविद्यालय में मुसलमान छात्राओं को यदि हिजाब पहनने की अनुमति दी जाती हो, तो हिन्दू छात्रों को गले में भगवा रूमाल धारण करने में भी कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए । वहां के छात्रों ने यह सूत्र उपस्थित किया है ।
इसमें इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नेहरू स्मृति संग्रहालय आदि सम्मिलित !
प्रशासन द्वारा धर्मांतरण की घटनाओं पर अंकुश न लगाने पर, कठोर आंदोलन करने की चेतावनी !