संपादकीय : भारत में विदेशियों का हस्तक्षेप !
आधुनिक युद्ध का परिवर्तित स्वरूप देखते हुए रणनीति में परिवर्तन करना, कालानुसार भारत के लिए आवश्यक !
आधुनिक युद्ध का परिवर्तित स्वरूप देखते हुए रणनीति में परिवर्तन करना, कालानुसार भारत के लिए आवश्यक !
आसिया अंद्राबी को दंड मिलने से जिहादी आतंकवाद के प्रचार, जिहादी गतिविधियों के लिए आर्थिक सहायता एवं सीमा पार समन्वय के माध्यम से भारत विरोधी गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के आरोपी अनेक अलगाववादी गुटों के विरुद्ध सुरक्षा एजेंसियों के दीर्घकालिक अभियानों को बडी सफलता मिली है ।
यूरोप से ड्रोन मंगवाकर म्यांमार के आतंकवादियों को कर रहे थे वितरण (सप्लाई) !
२७ जनवरी को भुवनेश्वर के सुन्दरपाड़ा क्षेत्र में एक विस्फोट हुआ था । इस घटना में ४ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे । यह घटना केवल स्थानीय अपराध तक सीमित नहीं हो सकती, अपितु सुरक्षा से जुडी बडी चुनौती भी हो सकता है ।
देश के प्रत्येक मौलाना पर अब निगरानी रखने का समय आ गया है ।
देश में जिहादी आतंकवाद को समाप्त करने के लिए अब उसकी मानसिकता बनने वाली प्रत्येक बात पर कार्यवाही प्रारम्भ करना आवश्यक हो गया है ।
जिहादी आतंकवाद की समस्या जड से समाप्त न होने के कारण ये आतंकवादी अधिकाधिक आधुनिक शस्त्रों का उपयोग करने का प्रयास कर रहे हैं, यही इससे ध्यान में आता है ।
‘कोई भी आतंकवादी आक्रमण भारत के विरुद्ध युद्ध समझा जाएगा’, ऐसा भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय आधिकारिक रूप से घोषित किया था, इसलिए अब यह आक्रमण युद्ध ही है तथा ‘ऑपरेशन सिंदूर २’ करना आवश्यक है;
उन जेल अधिकारियों को दंडित किया जाना चाहिए जो कैदियों को ये सुविधाएं उपलब्ध होने देते हैं !
ब्रिटेन के नागरिकों को पॉलिसी के नाम पर ठगनेवाले खुटवडनगर स्थित अवैध ‘कॉल सेंटर’ पर केंद्रीय अन्वेषण विभाग (सीबीआई) ने छापा मारा ।