बंगाल सर्वाधिक ध्रुवीकरण वाला राज्य ! – Supreme Court

  • मालदा (बंगाल) में ७ न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना पर सर्वोच्च न्यायालय क्रोधित

  • घटना की जांच का आदेश

  • अधिकारियों को पूर्णकालिक सुरक्षा प्रदान करने का आदेश

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत

नई देहली – बंगाल के मुसलमानबहुल मालदा में निर्वाचक नामावली (मतदाता सूची) के गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के समय कुछ अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना १ अप्रैल को घटित हुई । इस घटना का सर्वोच्च न्यायालय ने गंभीर संज्ञान लेते हुए इस प्रकरण की जांच ‘राष्ट्रीय जांच अभिकरण’ (NIA) अथवा ‘केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो’ (CBI) को सौंपने के निर्देश निर्वाचन आयोग को दिए । साथ ही पुनरीक्षण की प्रक्रिया करने वाले न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा हेतु केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात करने के निर्देश भी दिए । सुनवाई के समय न्यायालय ने कहा कि, ३ महिलाओं सहित ७ न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना अत्यंत निंदनीय है । यह घटना पूर्वनियोजित एवं जानबूझकर की गयी है l बंगाल में प्रत्येक व्यक्ति केवल राजनीतिक भाषा बोल रहा है । मैं स्वयं रात्रि २ बजे तक स्थिति पर दृष्टि बनाए हुए था । अतः ‘इसके पीछे कौन है ?’, यह हमें ज्ञात है । बंगाल देश का सर्वाधिक ध्रुवीकरण से ग्रस्त राज्य है ।

न्यायालय ने न्यायिक अधिकारियों के निवास स्थान पर भी केंद्रीय बल तैनात करने के आदेश दिए । किसी भी न्यायिक अधिकारी अथवा उनके परिजनों को कोई भी संकट उत्पन्न होने पर तत्काल स्थिति का मूल्यांकन कर सुरक्षा उपाय योजना कार्यान्वित करने के आदेश दिए ।

मालदा में क्या घटित हुआ ?

बंगाल के मालदा जनपद के कालियाचक में निर्वाचक नामावली से नाम हटाए जाने के विरोध में हिंसक आंदोलन हुआ । क्रुद्ध भीड ने बीडीओ (BDO) कार्यालय का घेराव करते हुए वहां तोडफोड की एवं वाहनों को क्षति पहुंचाई । इस समय निर्वाचक नामावली के संदर्भ में कार्य हेतु आए ७ न्यायिक अधिकारियों को, जिनमें ३ महिला न्यायाधीश सम्मिलित थीं, उन्हें ८-९ घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया ।

इस घटना के पश्चात न्यायमूर्ति सूर्यकांत के आदेश के उपरांत ही प्रशासन सक्रिय हुआ तथा रात्रि में कठोर निर्देश देकर स्थिति को नियंत्रित किया गया । इस समय पत्थरबाजी भी हुई । अधिकारियों को पुलिस एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की सहायता से बाहर निकालते समय भी उन पर पथराव किया गया ।

संपादकीय भूमिका 

बंगाल में ऐसी घटना घटित होना आश्चर्यजनक नहीं है । यद्यपि न्यायालय ने अब आदेश दिया है, तथापि वहां की विधि एवं व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए पुनः ऐसी घटना घटित नहीं होगी, इसकी निश्चितता कोई नहीं दे सकता !