Delhi Blast : आतंकवादी चिकित्सक ड्रोन तथा रॉकेट द्वारा करना चाहते थे आक्रमण !

आतंकवादी डॉ. उमर नबी

नई दिल्ली – लाल किले के पास आत्मघाती बम विस्फोट करने वाले आतंकवादी चिकित्सकों के समूह ने इससे पहले हमास आतंकवादी संगठन की तरह ही ड्रोन तथा रॉकेट द्वारा आक्रमण करने का षडयंत्र रचा था, ऐसी सूचना सामने आई है । इस विस्फोट के प्रकरण में अब तक जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ८ लोगों को बंदी बनाया है ।

१. आत्मघाती बम विस्फोट करने वाले डॉ. उमर उन नबी के साथी जसीर बिलाल वाणी उपनाम दानिश को बंदी बनाने के बाद राष्ट्रीय अन्वेषण दल (NIA) को यह सूचना मिली । दानिश कश्मीर के अनंतनाग जिले के काज़ीगुंड का निवासी है । उसे ४ दिन पहले श्रीनगर से बंदी बनाया गया है ।

२. जांच दल ने सूचना देते हुए बताया कि, दानिश को छोटे ड्रोन शस्त्र बनाने का अनुभव है । उसने आतंकवादी आक्रमण करने के लिए डॉ. उमर को तकनीकी सहायता प्रदान की थी । वह षड्यंत्र में सक्रिय रूप से सम्मिलित था । वह ड्रोन में बदलाव करके आतंकवादी आक्रमणों के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करने के साथ रॉकेट विकसित करने का प्रयास भी कर रहा था । दानिश के पास तकनीकी कौशल था । वह ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक पार्ट, मोटर तथा ‘लोड कैपेसिटर’ में बदलाव करके उन पर विस्फोटक लगा सके, ऐसी रचना (सेटअप) कर रहा था ।

३. दानिश ने कैमरे तथा भारी बम ले जाए जा सकने वाली बडी बैटरियों से सुसज्जित शक्तिशाली ड्रोन बनाने का प्रयास किया था । आतंकवादी समूह ने अधिकतम जान-माल की हानि करने के लिए भीड-भाड वाली जगहों पर ड्रोन द्वारा बम गिराने की योजना बनाई थी ।

४. अन्वेषण यंत्रणा के अनुसार, यह साजिश केवल चार पहियों वाली गाड़ी द्वारा बम विस्फोट करने तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि ३ स्तरों पर आक्रमण की साजिश थी । जिसमें ड्रोन, रॉकेट तथा अंत में कार बम का समावेश था । हमास ने इजरायल में तथा इस्लामिक स्टेट ने सीरिया एवं इराक में यही तरीका अपनाया था ।

ड्रोन एवं रॉकेट द्वारा विस्फोट करने का षड्यंत्र असफल होने पर कार बम का उपयोग !

अन्वेषण में यह सामने आया कि, ‘रॉकेट लॉन्चर’ जैसी ‘मैन्युअल ट्यूब’ विकसित की जा रही थी । उसकी जांच एक छोटे विस्फोटक उपकरण द्वारा की गई ।

मार क्षमता लगभग ३०० से ४०० मीटर होने का अनुमान था । यह सब प्रारंभिक चरण में था; परंतु ‘या तो ड्रोन या रॉकेट द्वारा आक्रमण करना’, यह योजना स्पष्ट थी । इसका अर्थ यह था कि, दिल्ली में पहला आतंकवादी आक्रमण रॉकेट द्वारा हुआ होता । ड्रोन तथा रॉकेट के साथ दोनों प्रयास असफल होने पर आतंकवादियों ने कार बम का तीसरा एवं अंतिम विकल्प स्वीकार किया तथा इसी विस्फोट से दिल्ली दहल गई ।

विस्फोट से पहले का डॉ. उमर का वीडियो आया सामने

लाल किले के पास आत्मघाती आक्रमण करने वाले आतंकवादी डॉ. उमर नबी का आक्रमण से पहले का एक वीडियो सामने आया है । विस्फोट से पहले उसने वीडियो शूट किया था । उसमें वह आत्मघाती आक्रमण के विषय में बता रहा है । इसमें वह कहता है कि, सबसे बड़ी गलती यह है कि लोगों को आत्मघाती आक्रमण की कल्पना वास्तव में क्या है ?, यह समझ नहीं आता । किसी भी सुसंस्कृत समाज में उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता । उसके विषय में अनेक विरोधाभास एवं तर्क हैं । आत्मघाती आक्रमणों में सबसे बड़ी समस्या यह है कि, जब कोई व्यक्ति ऐसा विश्वास रखता है कि, वह निश्चित रूप से एक विशिष्ट समय एवं स्थान पर मरेगा, तब वह बहुत खतरनाक मानसिक स्थिति में प्रवेश करता है । वह स्वयं को ऐसी स्थिति में रखता है, जहां उसे लगता है कि, मृत्यु ही उसका अंतिम लक्ष्य है; परंतु सत्य यह है कि, ऐसी विचारसरणी या ऐसी परिस्थितियां किसी भी लोकतांत्रिक एवं मानवीय व्यवस्था में स्वीकार नहीं की जा सकतीं; क्योंकि वे जीवन, समाज तथा कानून के मूलभूत सिद्धांतों के विरुद्ध जाती हैं । (इस प्रकार के आत्मघाती आक्रमण से कुछ भी साध्य नहीं होता, यह दुनियाभर की ऐसी घटनाओं से ध्यान में लेना चाहिए ! – संपादक)

संपादकीय भूमिका

जिहादी आतंकवाद की समस्या जड से समाप्त न होने के कारण ये आतंकवादी अधिकाधिक आधुनिक शस्त्रों का उपयोग करने का प्रयास कर रहे हैं, यही इससे ध्यान में आता है । आज वे असफल रहे हों, फिर भी भविष्य में क्या होगा ?, यह कहा नहीं जा सकता । इसलिए जिहादी आतंकवाद को नष्ट करने के लिए अब युद्धस्तर पर प्रयास करना अनिवार्य है !