सनातन के ज्ञान प्राप्त करनेवाले साधकों की भांति सूक्ष्म से ज्ञान प्राप्त करनेवाले साधक पृथ्वी पर अत्यल्प होने के कारण

‘‘कु. मधुरा भोसले, श्री. निषाद देशमुख और श्री. राम होनप जैसे सनातन के ज्ञान प्राप्त करनेवाले साधकों की भांति सूक्ष्म से ज्ञान प्राप्त करनेवाले साधक पृथ्वी पर कितने हैं ? यदि उनकी संख्या विशेष नहीं है, तो उसके क्या कारण हैं ?’’

‘यूनिवर्सल ऑरा स्कैनर’ उपकरण के माध्यम से आध्यात्मिक शोध करते समय आनेवाली सीमाओं को ध्यान में रखते हुए, ‘महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय’ द्वारा आध्यात्मिक शोध में ‘लोलक परीक्षण’ (Pendulum Testing) को जोडना

वर्ष २०२१-२०२२ के मध्य ‘यूनिवर्सल ऑरा स्कैनर’ उपकरण द्वारा परीक्षण करते समय, कुछ घटकों का प्रभामंडल (Aura) २३०० मीटर से भी अधिक पाया गया। स्थान की कमी के कारण इतनी विशाल दूरी को सटीक रूप से मापना संभव नहीं हो पा रहा था।

तमिलनाडु के श्री रामेश्वरम् (रामनाथस्वामी) मंदिर की सनातन की एक स्त्री संत को अनुभव हुईं सूक्ष्म स्तरीय विशेषताएं

यह तीर्थक्षेत्र बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक तथा चार धामों में से एक माना जाता है । सनातन की एक स्त्री संत को श्री रामेश्वरम् (रामनाथस्वामी) मंदिर का छायाचित्र देखकर जो सूक्ष्म स्तर की विशेषताएं अनुभव हुईं, वह आगे दी हैं ।

‘व्यक्ति के निधन के समय उसके पास उसके मृत संबंधी क्यों आते हैं ?’, इस विषय में श्री. राम होनप को सूक्ष्म से प्राप्त ज्ञान !

साधना न करनेवाले व्यक्ति का निधन होने के पश्चात सूक्ष्म लोक में उसके जटिल संघर्षमय जीवन का आरंभ होता है । ‘इस दुष्चक्र से मुक्ति मिले’, इसके लिए प्रतिदिन साधना करना महत्त्वपूर्ण है ।’

‘ईश्वर द्वारा मनुष्य को धर्म देने के कारण क्या हैं ?’ इस विषय में श्री. राम होनप को सूक्ष्म से प्राप्त ज्ञान !

सत्त्वगुण के कारण व्यक्ति को उचित एवं अनुचित का ज्ञान होता है । रजोगुण के कारण व्यक्ति उत्तम प्रकार से कार्य कर सकता है । तमोगुण के कारण व्यक्ति को निद्रा आती है । यदि इन तीनों गुणों का संतुलन बना रहे, तो व्यक्ति का जीवन उत्तम प्रकार से चलता है ।

परमेश्वर की माया से ब्रह्मांड में पृथ्वी एवं मनुष्य की रचना, जबकि आदि पुरुष एवं आदि स्त्री के पतन से विविध योनियों की रचना हुई !

प्रश्न : सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले : भगवान ने विश्व, मनुष्य एवं जानवरों की रचना क्यों की ? (१५.३.२०२५) उत्तर : श्री. राम होनप : १. ब्रह्मांड : ब्रह्मांड एक ही है तथा इसमें जो कुछ उत्पन्न होता है (जैसे ग्रह, तारे, नक्षत्र आदि), वह कुछ समय तक रहता है । उसके उपरांत उसका विलय … Read more

सूक्ष्म ज्ञान-प्राप्तकर्ता साधक श्री. निषाद देशमुख को ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद’ महोत्सव के बोधचिह्न के संदर्भ में अनुभव हुए सूक्ष्म स्तरीय सूत्र !

मुझे अनुभव हुआ कि बोधचिह्न को लगातार कुछ सेकंड देखने पर ‘वह बडा-बडा होकर विश्व को व्याप्त कर रहा है ।’ ‘व्यापकता’ आकाशतत्त्व का गुणधर्म है ।

भारत एवं पाकिस्तान के मध्य संघर्ष का सूक्ष्म परीक्षण !

‘७.५.२०२५ की रात को भारत ने पाकिस्तान के ९ आतंकवादी स्थलों पर क्षेपणास्त्रों द्वारा आक्रमण कर उन्हें ध्वस्त किया । ८.५.२०२५ को पाकिस्तान ने भारत के शहरों पर क्षेपणास्त्रों द्वारा आक्रमण किया ।

कलियुग वर्ष ५१२७ (वर्ष २०२५) का विभिन्न परिप्रेक्ष्य में महत्त्व !

३०.३.२०२५ से हिन्दू कालगणना के अनुसार कलियुग वर्ष ५१२७ का आरंभ हो गया है । इस वर्ष का आध्यात्मिक महत्त्व क्या है ? इस काल में संधिकाल का क्या महत्त्व है ?, यह वर्ष हिन्दुत्व की दृष्टि से कैसे रहेगा ?

श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी द्वारा की गई भावपूर्ण पूजा के कारण श्री लक्ष्मीपूजन के घटकों में सकारात्मक ऊर्जा (चैतन्य) अत्यधिक बढ जाना 

दिवाली में लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्त्व है । पुराणों में वर्णन है कि कार्तिक अमावस्या की रात को लक्ष्मीजी सर्वत्र भ्रमण करती हैं तथा अपने निवास के लिए उपयुक्त स्थान ढूंढने निकल पडती हैं ।