हिन्दू नववर्ष के ग्रहयोग : ज्योतिषशास्त्रीय विश्लेषण !
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से ‘काल’ अनंत तथा अविभाज्य है, फिर भी हमारे हिन्दू ऋषि-मुनियों ने सांसारिक एवं व्यावहारिक समतुल्य समय को चार युगों (सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग तथा कलियुग), सहस्रयुग, शतक, दशक, वर्ष, मास, दिन, घटी, पल और विपल जैसी विभिन्न इकाइयों में विभाजित करते समय मापन की उचित पद्धति स्थापित की ।