नवसंवत्स‍र निमित्त संदेश

नवसंवत्‍सर आरंभ अर्थात चैत्र शुक्‍ल प्रतिपदा अथवा गुडी पडवा हिन्‍दुओं का वर्ष आरंभ है । यह युगादि तिथि शास्‍त्र अनुसार साढे तीन मुहूर्तों में से एक है । इसलिए इस दिन शुभ कार्य किए जाते हैं अथवा कार्य का नया संकल्‍प किया जाता है ।

चैतन्‍यदायी ब्रह्मध्वजा !

तंत्रग्रंथ के ‘गणेशयामल’ नामक तंत्रग्रंथ में ‘अजान लोक में नक्षत्र लोक के (कर्मदेव लोक के)२७ नक्षत्रों से निकली तरंगों में से प्रत्‍येक के ४ चरण (विभाग) बनते हैं तथा पृथ्‍वी पर २७ x ४ = १०८ तरंगें आती हैं ।’ उनके विघटन से यम, सूर्य, प्रजापति एवं संयुक्‍त, ऐसी ४ तरंगें बनती हैं । 

गुडी पडवा के दिन बनाई जानेवाली सात्त्विक रंगोली

जिस भाव से ब्रह्मध्‍वज की पूजा जाती है, उसी भाव से उसे उतारना चाहिए, तब ही जीव को चैतन्‍य मिलता है । मीठे पदार्थ का भोग लगाकर और प्रार्थना कर ध्‍वजा उतारनी चाहिए ।

ब्रह्मध्वजा पर रखे जानेवाले तांबे के कलश का महत्त्व !

ब्रह्मध्‍वजा (गुडी) पर तांबे का कलश उल्‍टा रखते हैं । आजकल ऐसा देखने को मिलता है कि कुछ लोग ब्रह्मध्‍वजा पर स्‍टील या तांबे का लोटा अथवा घडे के आकारवाला बरतन रखते हैं ।

भारतीय संस्कृति अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर सात्त्विक वातावरण में ब्रह्मध्वज पूजन कर नववर्ष का स्‍वागत करना आध्यात्मिक दृष्टिण से लाभदायक !

भारतीय परंपरा के अनुसार चैत्र शुक्‍ल पक्ष प्रतिपदा अर्थात गुडी पडवा नववर्ष का आरंभ है ! इस दिन सवेरे अभ्‍यंग स्नान कर, ब्रह्मध्‍वज का पूजन कर नववर्ष का स्‍वागत किया जाता है ।