हिन्दू नववर्ष के ग्रहयोग : ज्योतिषशास्त्रीय विश्लेषण !

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से ‘काल’ अनंत तथा अविभाज्य है, फिर भी हमारे हिन्दू ऋषि-मुनियों ने सांसारिक एवं व्यावहारिक समतुल्य समय को चार युगों (सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग तथा कलियुग), सहस्रयुग, शतक, दशक, वर्ष, मास, दिन, घटी, पल और विपल जैसी विभिन्न इकाइयों में विभाजित करते समय मापन की उचित पद्धति स्थापित की ।

मैं उगादी (हिन्दुओं का नववर्ष) एवं शिवरात्रि के समय में मांसाहार करता हूं ! – Siddaramaiah

किसे क्या खाना चाहिए तथा क्या नहीं खाना चाहिए ?, यह प्रत्येक नागरिक का व्यक्तिगत अधिकार है; परंतु जानबूझकर हिन्दुओं के नववर्ष के दिन मांसाहार करने की बात करना हिन्दुओं को आहत करना है ।

ठाणे, गिरगांव एवं विलेपार्ले में निकाली गईं नववर्ष स्वागतयात्राआं में सनातन संस्था की ओर से प्रस्तुत की गई ‘रामराज्य’ की संकल्पना !

हिन्दू नववर्ष के उपलक्ष्य में पूरे राज्य में बडे हर्षाेल्लास के साथ स्वागतयात्राएं संपन्न हुईं । स्वागतयात्राओं में रामसेतू की संकल्पना साकार करते हुए हाथ में प्रतिकात्मक शीला लेकर सनातन संस्था के साधक सहभागी हुए ।

शाश्वत परिवर्तन !

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा अर्थात नववर्षारंभ ! अर्थात पुराने को त्यागकर नए को अंगीकार करना ।

ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक आधारों से समृद्ध  हिन्दुओं का नववर्षारंभ !

इस वर्ष ३० मार्च २०२५ को नवसंवत्सर अर्थात गुडी पडवा है । इस मंगल दिवस के उपलक्ष्य में हम नववर्षारंभ के संबंध में अधिक जानकारी लेंगे । नवसंवत्सर के विषय में सामान्य प्रश्न तथा हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे द्वारा उनके दिए उत्तर –

नवसंवत्सर के दिन शुभ संकल्प लेंगे !

नवसंवत्सर के शुभ मुहूर्त पर स्वयं की प्रकृति के अनुसार लिए जानेवाले संकल्प दैवी ऊर्जा के कारण निश्चित ही फलिभूत होते हैं । इस उपलक्ष्य में हम कुछ संकल्प एवं निश्चय कर वर्षारंभ का लाभ उठा सकते हैं ।  

हिन्दुओ, धर्माचरण कर नवसंवत्सर का त्योहार सात्त्विक पद्धति से मनाकर स्वयं में धर्मतेज जागृत करेंगे !

‘साक्षात ईश्वर ने सनातन हिन्दू धर्म की निर्मिति की है । उसके कारण धर्म का प्रत्येक अंग शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से १०० प्रतिशत उचित, लाभकारी तथा परिपूर्ण है ।

हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा उत्तर भारत में ‘हिन्दू नववर्ष’ के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम संपन्न एवं सनातन संस्था द्वारा ग्रंथ-प्रदर्शनी का आयोजन !

इस कार्यक्रम में ‘हिन्दू नववर्ष’ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को क्यों मनाया जाता है ? इस दिन ब्रह्मध्वजारोहण क्यों किया जाता हैे ? ब्रह्मध्वजारोहण की उचित पद्धति’, साथ ही अन्य अध्यात्मशास्त्रीय जानकारी दी गई ।

हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा ‘गुडी पडवा’ विषय पर ‘ऑनलाइन’ प्रवचन संपन्न !

वर्तमान में पश्चिमी संस्कृति का अंधानुकरण कर सर्वत्र १ जनवरी को नया वर्ष मनाया जाता है । देखा जाए तो, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा ही हिन्दुओं का नववर्ष है । ब्रह्मदेव ने इसी दिन ब्रह्मांड की निर्मिति की थी । इसी दिन से सत्ययुग का प्रारंभ हुआ, तथा इसी दिन से हिन्दू संस्कृति की कालगणना का आरंभ हुआ ।

नववर्षारंभ दिन का संदेश

हिन्दुओ, चैत्र प्रतिपदा इस ‘युगादि तिथि’ को नववर्ष के प्रारंभ के रूप में मान्यता मिलने के लिए शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और राजनैतिक प्रयासों की पराकाष्ठा कीजिए और भारत में ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित कीजिए !