सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की विभिन्न कृतियों से प्रक्षेपित स्पंदनों का अध्ययन

‘मनुष्य की विभिन्न कृतियां प्रधानता से सत्त्वगुणी, रजोगुणी अथवा तमोगुणी होती हैं । उन गुणों के अनुसार संबंधित कृति से स्पंदन प्रक्षेपित होते रहते हैं । ‘उच्च आध्यात्मिक स्तर के अर्थात ‘परात्पर गुरु’ स्तर के संतों के संदर्भ में यह कैसे होता है ?’, इसका अध्ययन किया गया ।

श्री राजमातंगी महायज्ञ के निर्विघ्न संपन्न होने हेतु श्री सिद्धिविनायक के चरणों में सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सद्गुरुओं तथा संतों द्वारा प्रार्थना !

‘वर्तमान युद्धकाल में तपोभूमि भारत को संरक्षण कवच प्राप्त हो तथा भारत की सर्वांगीण उन्नति हो’, इस हेतु सनातन संस्था की ओर से १७ मई को मुंबई के प्रभादेवी स्थित नर्दुल्ला टैंक मैदान में ‘श्री राजमातंगी महायज्ञ’ का भव्य आयोजन किया गया ।

श्री राजमातंगी महायज्ञ के निर्विघ्न संपन्न होने हेतु श्री सिद्धिविनायक के चरणों में सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सद्गुरुओं तथा संतों द्वारा प्रार्थना !

‘वर्तमान युद्धकाल में तपोभूमि भारत को संरक्षण कवच प्राप्त हो तथा भारत की सर्वांगीण उन्नति हो’, इस हेतु सनातन संस्था की ओर से १७ मई को मुंबई के प्रभादेवी स्थित नर्दुल्ला टैंक मैदान में ‘श्री राजमातंगी महायज्ञ’ का भव्य आयोजन किया गया ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ‘हिन्दू राष्ट्र आएगा’, केवल इतना कहते ही नहीं, अपितु उसे साकार करने के लिए भी प्रयत्नरत !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीे ने वर्ष २०१२ में केवल हिन्दू राष्ट्र के विषय में ही नहीं बताया, अपितु ‘उसके लिए क्या प्रयास करने चाहिए ?’ यह भी बताया और वे इसके लिए प्रयास भी करवा रहे हैं :

तमिलनाडु के श्री रामेश्वरम् (रामनाथस्वामी) मंदिर की सनातन की एक स्त्री संत को अनुभव हुईं सूक्ष्म स्तरीय विशेषताएं

यह तीर्थक्षेत्र बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक तथा चार धामों में से एक माना जाता है । सनातन की एक स्त्री संत को श्री रामेश्वरम् (रामनाथस्वामी) मंदिर का छायाचित्र देखकर जो सूक्ष्म स्तर की विशेषताएं अनुभव हुईं, वह आगे दी हैं ।

श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी का सर्वाेच्च गुण ‘प्रीति’ !

श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी में अनेक गुण हैं, परंतु उनका सर्वाेच्च गुण (मुकुटमणि) है प्रीति !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के पूजाघर में स्थित सनातन-निर्मित श्री लक्ष्मीदेवी के चित्र से सूक्ष्म चैतन्य एवं आनंद के स्पंदन प्रक्षेपित होना

इस लेख से हम गुरुदेवजी के पूजाघर में स्थित सनातन-निर्मित श्री लक्ष्मीदेवी के चित्र की आध्यात्मिक विशेषताएं समझ लेते हैं ।

सनातन संस्था के तीनों अवतारी गुरुओं के अवतारत्व की स्थूल से हो रही प्रतीति

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की अनेक उपलब्धियां केवल साधक ही नहीं, अपितु समाज के महनीय व्यक्ति भी अचंभित होकर देख रहे हैं । ३० वर्षों की अल्पावधि में इतना विशाल कार्य केवल अवतारी व्यक्ति ही कर सकते हैं  !

‘श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति श्रीमती अंजली गाडगीळजी, ये दोनों अवतारी जीव हैं’, स्थूल से यह किस प्रकार ध्यान में आ सकता है, इसकी संक्षिप्त जानकारी

महर्षियों के बताए जाने पर साधकों को इन दोनों के विषय में अनुभूतियां होने लगीं । ‘वे दोनों अवतारी जीव हैं’, स्थूल से यह किस प्रकार ध्यान में आ सकता है, यहां इसकी संक्षेप में जानकारी देखते हैं ।

साधको, वर्तमान समय में अनिष्ट शक्तियों के कष्ट दूर करने हेतु ‘ॐ’ यह नामजप मिल रहा है, इसका अर्थ वर्तमान समय में अनिष्ट शक्तियों का सर्वाेच्च स्तर का आक्रमण हो रहा है तथा यह अंतिम लडाई होने से हमने साधना बढाई, तो धर्म की विजय होनेवाली है !

‘साधकों की साधना खंडित करने हेतु अनिष्ट शक्तियां साधकों पर सूक्ष्म से आक्रमण करती हैं । अनिष्ट शक्तियों के कारण होनेवाले कष्ट दूर करने हेतु साधकों को प्राणशक्तिवहन उपायपद्धति के अनुसार उपाय करते समय नामजप खोजना पडता है ।