मैं उगादी (हिन्दुओं का नववर्ष) एवं शिवरात्रि के समय में मांसाहार करता हूं ! – Siddaramaiah

किसे क्या खाना चाहिए तथा क्या नहीं खाना चाहिए ?, यह प्रत्येक नागरिक का व्यक्तिगत अधिकार है; परंतु जानबूझकर हिन्दुओं के नववर्ष के दिन मांसाहार करने की बात करना हिन्दुओं को आहत करना है ।

गदग (कर्नाटक) के रामलिंगेश्वर मंदिर के शिवलिंग एवं नंदी की मूर्ति की तोडफोड

हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएं आहत करने के लिए जानबूझकर महाशिवरात्रि के दिन ही यह दुष्कृत्य किया है । हिन्दुओं के देश में इस प्रकार का दुष्कृत्य करने का साहस दिखाया जाना हिन्दुओं के लिए लज्जाप्रद है !

शिवजी को बिल्वपत्र अर्पित करने की पद्धति का अध्यात्मशास्त्रीय आधार

बिल्वपत्र तारक शिवतत्त्व का वाहक है और बिल्वपत्र का डंठल मारक शिवतत्त्व का वाहक है ।

महादेव को त्रिपुंड क्यों लगाते हैं ?

शिवशंकर की पूजा में भक्तगण त्रिपुंड अवश्य लगाते हैं । शिवलिंग पर त्रिपुंड सदैव देखने को मिलता है ।

विभूति एक रहस्य, शक्ति तथा उसका महत्त्व !

शरीर में ऊर्जा के स्रोत को प्रवाहित करने में बाधा आ रही हो, तो विभूति लगाने से शरीर के वे द्वार खुल जाते हैं, जिनसे ऊर्जा के स्रोत प्रवेश करते हैं तथा उससे शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा की आपूर्ति होती है ।

त्रिशूल की उत्पत्ति कैसे हुई ?

‘विष्णुपुराण के अनुसार श्री विश्वकर्मा ने त्रिशूल की निर्मिति की ।’ इससे संबंधित एक पौराणिक कथा है । देवताओं के शिल्पी श्री विश्वकर्मा की पुत्री संजना का विवाह सूर्यदेव के साथ हुआ था; परंतु सूर्यदेव के असीम तेज से संजना को उनके साथ रहना संभव नहीं हो पा रहा था ।

शिवलिंग एवं उसके विभिन्न प्रकारों की जानकारी

वर्तमान समय में सबसे अधिक उपयोग में लाया जानेवाला शिवलिंग है ‘स्फटिक शिवलिंग !’ इस शिवलिंग का लाक्षणिक महत्त्व यह है कि अनिष्ट शक्तियों का नाश करने के लिए मुख्य रूप से इस शिवलिंग का उपयोग किया जाता है ।

बर्फ के शिवलिंग के रूप में भगवान शिव के अस्तित्व से युक्त अमरनाथ गुफा !

अमरनाथ की गुफा में बर्फ का शिवलिंग तैयार होता है । भगवान शिव ने माता पार्वती को इसी गुफा में अमरत्व का मंत्र दिया था, यही है इस गुफा का महत्त्व ।

महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में सनातन के ग्रंथों एवं सात्त्विक उत्पादों का अधिक से अधिक वितरण करें !

अखिल विश्व में धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र की नींव रखने तथा जिज्ञासुओं को धर्माचरणी बनाने में सनातन द्वारा प्रकाशित ग्रंथों का बहुमूल्य योगदान है ।

ग्रन्थमाला : देवताओं की उपासना

शिवजी की उपासना भावपूर्ण एवं शास्त्रोक्त कैसे करें, यह सिखानेवाले सनातन के ग्रंथ !