अपनी सहज बातचीत एवं सरल व्यवहार से भक्तों को सिखानेवाले प.पू. भक्तराज महाराजजी !

प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा ‘गुरु से मिलने जाते समय भक्तों को मन में संदेह नहीं रखना चाहिए’, यह सिखाया जाना

प.पू. भक्तराज महाराजजी के पावन सान्निध्य की कुछ हृदयस्पर्शी स्मृतियां !

प.पू. भक्तराज महाराजजी (प.पू. बाबा) द्वारा लिखित तथा ढूंढकर भी किसी को न मिलनेवाला ग्रंथ प.पू. बाबा द्वारा आश्रम से ढूंढकर लाया जाना

कोटि-कोटि प्रणाम !

वसंत पंचमी (२३ जनवरी) को सनातन के श्रद्धास्रोत प.पू. भक्तराज महाराजजी का प्रकट दिन है, इस निमित्त उनके चरणों में कृतज्ञतापूर्वक नमस्कार !

साधना करने से ‘एकै साधे सब सधै, सब साधै सब जाय ।’ की अनुभूति ली जा सकती है !  

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा अनुभव किया गया श्री गुरु का महत्त्व !

प.पू. भक्तराज महाराजजी (प.पू. बाबा) से हुई पहली भेंट के कुछ विशेष प्रसंग !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के गुरु प.पू. भक्तराज महाराजजी के महानिर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में उनके चरणों में सनातन परिवार का कृतज्ञतापूर्वक नमस्कार !

शिष्य डॉ. आठवलेजी के गुरु संत भक्तराज महाराजजी से संबंधित ग्रंथ !

ये ग्रंथ साधकों की भावजागृति कर उन्हें आनन्द एवं शांति की अनुभूति प्रदान करनेवाली अनमोल धरोहर ही हैं ।

प.पू. भक्तराज महाराजजी की कृपा से साधक का विभिन्न व्यसनों से मुक्त होना

प.पू. भक्तराज महाराजजी की समाधि के दर्शन करने हेतु कांदळी जाने पर वहां हुई अनुभूति

कलियुग में ईश्‍वरप्राप्ति का सुलभ एवं सरल मार्ग है नामस्मरण !

नाम की महिमा ऐसी है कि उसके कारण मन के विकार दूर होते हैं तथा अंतःकरण शुद्ध होता है एवं सद्गुरु को हृदय में विराजमान करने के लिए नाम अति आवश्यक है ।

डॉ. आठवलेजी का प.पू. भक्तराज महाराजजी तथा आश्रम के प्रति सेवाभाव तथा उन्हें सद्गुरु द्वारा प्राप्त बहुमूल्य आशीर्वाद !

प.पू. महाराजजी द्वारा प्रसन्न होकर डॉक्टरजी को दिया गया बहुमूल्य आशीर्वाद !