अगस्त २०२२ में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परिषदों में सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा लिखित आध्यात्मिक शोधकार्य पर आधारित २ शोधनिबंधों का प्रस्तुतीकरण !

विश्वविद्यालय ने अक्टूबर २०१६ से ३१ अगस्त २०२२ की अवधि में १७ राष्ट्रीय तथा ७९ अंतरराष्ट्रीय, ऐसे कुल मिलाकर ९६ वैज्ञानिक परिषदों में शोधनिबंध प्रस्तुत किए हैं । विश्वविद्यालय को अभी तक कुल ११ अंतरराष्ट्रीय परिषदों में ‘सर्वाेत्कृष्ट प्रस्तुतीकरण पुरस्कार’ प्राप्त हुए हैं ।

बांसुरीवादन के द्वारा संगीत साधना, क्रियायोग की ध्यानसाधना तथा चिन्मय मिशन की ज्ञानसाधना के आनंद की निरंतर अनुभूति लेनेवाले बांसुरीवादक पंडित हिमांशु नंदा !

भारत की गुरु-शिष्य परंपरा के अनुसार श्री गुरु शिष्य पर क्रोधित होते हैं और आवश्यकता पडने पर गालियां भी देते हैं; परंतु शिष्य को उसका बुरा नहीं लगता । अन्य किसी ने गाली दी, तो क्रोध आएगा; परंतु श्री गुरु ने गाली दी, तो शिष्य कहता है, ‘यह तो श्री गुरु की कृपा हुई !’ यही शिष्य का समर्पण है ।

ठाणे के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पं. निषाद बाक्रे ने अवलोकन किया महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय का कार्य !

महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय का कार्य समझ लेने के लिए आए पं. निषाद बाक्रे ने रामनाथी (गोवा) के सनातन के आश्रम का भी अवलोकन कर वहां का कार्य समझ लिया ।

प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पं. निषाद बाकरे द्वारा प्रस्तुत किए गए ‘भूप’ राग के गायन का संतों, साथ ही आध्यात्मिक कष्ट से ग्रस्त तथा कष्टरहित साधकों पर हुआ परिणाम

इस प्रयोग के समय पं. बाक्रे को तबले पर गोवा के प्रसिद्ध तबलावादक डॉ. उदय कुलकर्णी तथा संवादिनी पर (हार्माेनियम पर) श्री. दत्तराज म्हाळशी ने संगत की ।

दैवी बालक मानवजाति को सुराज्य की ओर ले जाएंगे ! – श्रीमती श्वेता क्लार्क, गोवा

महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय को श्रीलंका की अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परिषद में ‘सर्वोत्कृष्ट’ पुरस्कार प्रदान ! शोधनिबंध के लेखक महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय के संस्थापक – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी एवं सहलेखक – श्री. शॉन क्लार्क व श्रीमती श्वेता क्लार्क !

मिलिंद चवंडके लिखित ‘श्रीकानिफनाथमाहात्म्य’ इस ग्रंथ को श्रद्धालुओं से मिला अभूतपूर्व प्रतिसाद !

‘श्रीकानिफनाथमाहात्म्य’ मराठी भाषा में काव्यबद्ध ग्रंथ का हिन्दी, अंग्रेजी, कन्नड एवं तेलगु भाषाओं में अनुवाद होने पर सर्व प्रांतों में श्रद्धालुओं को इस ग्रंथ का लाभ मिलेगा । उनका दैनंदिन जीवन सहज-सुलभ होने में बडी सहायता होगी, ऐसा श्रद्धालुओं का कहना है ।

सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ आठवलेजी के ८० वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में संतों से मिली शुभकामनाएं !

महर्षि अध्यात्म विश्विद्यालय की स्थापना कर उन्होंने (परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने) हिन्दू राष्ट्र की बात को केवल राजकीय रूप न देते हुए हमारी अध्यात्म विद्या को पुनः उजागर करने का और उसके भीतर अनेक प्रयोग कर, अनेक साधकों को तैयार करने का एक महनीय कार्य किया है ।

साधकजीवों को भक्तिरस में सराबोर करनेवाले श्रीमन्नारायण स्वरूप परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का दिव्य आनंददायी ‘रथोत्सव’ !

रथोत्सव में सम्मिलित साधकों के मुख पर भाव एवं आनंद, उन्होंने धारण की हुई सात्त्विक एवं पारंपरिक वेशभूषा, हाथ में लिया भगवा ध्वज, ध्यान आकर्षित करनेवाले फलक, श्रीराम शालीग्राम की पालकी एवं सभी के मुख में श्रीमन्नारायण का जयघोष, ऐसे भक्तिमय वातावरण में इस रथोत्सव का प्रारंभ हुआ । 

भारतीय संस्कृति का महत्त्व विद्यार्थियों पर अंकित करने हेतु महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय द्वारा प्रयागराज में पाठ्यक्रम का आरंभ !

महान हिन्दू संस्कृति के विषय में तथा ‘नामजप करने से मन की एकाग्रता बढकर पढाई मैं कैसे लाभ होता है’, इसकी जानकारी दी गई । सभी शिक्षक एवं विद्यार्थियों ने इसकी बहुत सराहना की तथा इस प्रकार के वर्ग प्रतिदिन लिए जाने की इच्छा भी व्यक्त की ।

‘महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय’ के अंतर्गत कार्यान्वित होनेवाले ग्रंथालय से संबंधित सेवा में सम्मिलित हों !

महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय के ग्रंथभंडार में ३५ सहस्र से अधिक मुद्रित ग्रंथ और १ लाख से अधिक ‘ई-बुक्स’ हैं तथा उसमें प्रतिदिन अनेक ग्रंथों की वृद्धि हो रही है । इसलिए इन ग्रंथों से संबंधित आगे की सेवा करने के लिए रामनाथी, गोवा के आश्रम में मानव संसाधन की आवश्यकता है ।