विशाल हृदय और प्रेम का अथांग सागर श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी !
समुद्र किनारे श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी के साथ एक सुंदर पल !
समुद्र किनारे श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी के साथ एक सुंदर पल !
संपूर्ण विश्व में कभी भी नष्ट न होनेवाली सप्तपुरी हैं । उनमें से ‘कांचीपुरम्’ एक नगरी है । यह मोक्षपुरी भी है । कामाक्षी देवी इस नगर की अधिष्ठात्री देवी हैं । श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी के ‘कांचीपुरम्’ में निवास हेतु आने का कारण आगे दिया है ।
श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी में अनेक गुण हैं, परंतु उनका सर्वाेच्च गुण (मुकुटमणि) है प्रीति !
‘प्रीति’ ईश्वर का स्थायीभाव है । मां जगदंबा करुणावत्सल हैं । श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी भी वैसी ही हैं । उनकी प्रीति की गहनता केवल साधकों तक सीमित नहीं है, अपितु ‘संपूर्ण विश्व को ही कैसे प्रेम दिया जा सकता है ?’, यह उनका विचार होता है ।
१७ से १९ मई २०२५ के मध्य गोवा के फर्मागुडी में ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ का आयोजन हुआ ।
इस अवसर पर भगवान कार्तिकेय का पूजन किया गया । तदुपरांत श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) गाडगीळजी ने ‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी को उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की ।
देह की मर्यादाएं होते हुए भी श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) गाडगीळजी अत्यंत दुर्गम स्थानों पर जाकर वहां भक्तिभाव से पूजादि अनुष्ठान करती हैं । साधकों की रक्षा हेतु सप्तर्षि जहां कहेंगे, वहां जाने के लिए वे सदैव तैयार रहती हैं ।
इस अवसर पर श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी ने ‘सर्वत्र के साधकों को हो रहे विभिन्न कष्ट दूर हों तथा हिन्दू राष्ट्र की शीघ्रातिशीघ्र स्थापना हो’, इसके लिए भावपूर्ण प्रार्थना की ।
इन ७ शिवमंदिरों में परंपरागत उत्सवों में जाने से श्रद्धालुओं के मनोरथ पूर्ण होते हैं । कुछ श्रद्धालु सप्त शिवमंदिरों के दर्शन का संकल्प लेकर मनौती मांगते हैं । अनेक ग्रामवासी मन में भिन्न-भिन्न संकल्प कर शिवमंदिरों में जाते हैं ।
सप्तर्षियों द्वारा जीवनाडी-पट्टिका में बताए अनुसार श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी १४.११.२०२२ को आंध्र प्रदेश में स्थित पिठापुरम् गई थीं । उस समय पिठापुरम् में हुई दैवीय लीला आगे दी है ।