श्री. चक्रवर्ती सुलीबेले कर्नाटक के प्रसिद्ध विचारक, लेखक तथा प्रखर वक्ता हैं । उनके देशप्रेम, सामाजिक जागृति तथा युवकों को प्रेरणा देने के कार्य के लिए वह कर्नाटक में जाने जाते हैं । वे ‘युवा ब्रिगेड’ नामक संस्था के माध्यम से १० वर्षाें से कार्य कर रहे हैं ।

१. ‘युवा ब्रिगेड’ संगठन की स्थापना
अ. श्री. चक्रवर्ती सुलीबेले ने ‘युवा ब्रिगेड’ नामक संगठन स्थापित किया है । इस माध्यम से वे युवकों में देशप्रेम, सामाजिक जागृति तथा सेवाभाव निर्माण कर रहे हैं । सहस्रों युवक इस संगठन में सम्मिलित होकर राष्ट्रसेवा का कार्य कर रहे हैं । इस संगठन ने नदियों का पुनरुज्जीवन, प्राचीन मंदिर तथा जलकुंडों की स्वच्छता, रक्तदान शिविर एवं ग्रामविकास योजना सफलतापूर्वक कार्यान्वित की हैं । उन्होंने ‘नवभारत निर्माण अभियान’ आरंभ कर देशभर के युवकों को प्रेरणा दी है ।
आ. उन्होंने स्वामी विवेकानंदजी के विचारों से प्रेरित होकर उनकी सीख पर आधारित अनेक भाषण दिए । वे युवकों को राष्ट्र की प्रगति के लिए कार्य करने का आवाहन कर रहे हैं ।
इ. युवकों को उद्योजकता का मार्गदर्शन करने के लिए ‘फिफ्थ पिलर’ नामक कार्यक्रम किया जा रहा है । इसके लिए युवकों के लिए ‘उद्योजकता परिषद’ आयोजित की जाती है ।
विशेष सदर !

छत्रपति शिवाजी महाराजजी द्वारा स्थापित हिन्दवी स्वराज्य के लिए जिसप्रकार मावळों (छत्रपति शिवाजी महाराजजी के सैनिकों को मावळे कहते थे) और धर्मयोद्धाओं द्वारा किया गया त्याग सर्वोच्च है, उसी प्रकार आज भी अनेक हिन्दुत्वनिष्ठ तथा राष्ट्रप्रेमी नागरिक हिन्दू धर्म एवं राष्ट्र की रक्षा के लिए ‘धर्मयोद्धा’ के रूप में कार्य कर रहे हैं । निधर्मीवादी सरकार, साथ ही प्रशासन और पुलिस से होनेवाला कष्ट सहन करते हुए वे निःस्वार्थभाव से केवल राष्ट्र-धर्मरक्षा के लिए रात-दिन संघर्ष कर रहे हैं । आज राष्ट्रविरोधी शक्ति निधर्मीवादियों के समर्थन से बलवान होकर हिन्दूविरोधी, इसके साथ ही राष्ट्रविरोधी षड्यंत्र करते हुए हमारे मन में ‘हिन्दुओं तथा राष्ट्र का आगे कैसे होगा ?’, ऐसी चिंता होती है । उस समय हिन्दुत्व तथा राष्ट्र की रक्षा के लिए लडनेवाले इन मावळों और धर्मयोद्धाओं के संघर्ष के उदाहरण पढने पर निश्चितरूप से हमारे मन की चिंता दूर होकर उत्साह निर्माण होगा । इसलिए हमने ऐसे धर्मयोद्धाओं तथा उनके हिन्दू धर्मरक्षा के संघर्ष की जानकारी देनेवाला ‘हिन्दुत्व के धर्मयोद्धा’ यह स्तंभ आरंभ किया है । इस माध्यम से भारत में सुराज्य निर्माण करने के लिए प्रयत्न करनेवालों की सभी को जानकारी होगी और उस दिशा में कार्य करने की प्रेरणा भी मिलेगी !
– संपादक
२. सामाजिक माध्यमों द्वारा जागरूकता
श्री. चक्रवर्ती सुलीबेले विविध सामाजिक माध्यमों द्वारा सक्रीय हैं तथा वे राष्ट्र एवं हिन्दू धर्म संबंधी विचार जनमानस तक पहुंचाते हैं । सामाजिक माध्यमों पर उनके लेखन के कारण लाखों लोग प्रभावित हुए हैं ।
३. वे विविध समाचारवाहिनियों पर चर्चासत्रों में हिन्दुत्व के पक्ष में प्रखर भूमिका अपनाते हैं । हिन्दू विरोधियों की कारस्तानियों का उन्होंने पर्दाफाश कर, उसे उजागर किया ।
४. श्री. चक्रवर्ती सुलीबेले को मिले पुरस्कार
अ. ‘युवा ब्रिगेड’ के माध्यम से किए गए सामाजिक कार्य के लिए कर्नाटक सरकार ने उन्हें २०२२ में ‘राज्योत्सव पुरस्कार’ दिया ।
आ. मैसुरू के ‘सावरकर प्रतिष्ठान’ ने ‘वीर सावरकर सम्मान पुरस्कार’ देकर उन्हें गौरवान्वित किया है ।
इ. ‘युवा ब्रिगेड’के विविध सामाजिक कार्याें के सम्मान स्वरूप वर्ष २०१८ में देहली के ‘चाणक्य वार्ता’ नामक संस्था द्वारा उन्हें ‘चाणक्य पुरस्कार’ प्रदान किया गया ।
५. प्रधानमंत्री मोदी द्वारा युवा ब्रिगेड के कार्य की प्रशंसा
श्रीरंगपट्टण में ७०० वर्ष पुराने वीरभद्रेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार युवा ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने २ माह में पूर्ण किया । दिसंबर २०२० में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ रेडियो पर प्रसारित होनेवाले कार्यक्रम में वीरभद्रस्वामी मंदिर के पुनर्निर्माण के विषय में ‘युवा ब्रिगेड’ के कार्य की प्रशंसा की । तदुपरांत वर्ष २०२३ तथा २०२४ में प्रजासत्ताकदिन के संचालन में युवा ब्रिगेड के २ कार्यकर्ताओं को विशेष निमंत्रण मिला ।
६. ‘युवा शक्ति’ का योगदान
श्री. चक्रवर्ती सुलीबेले के मार्गदर्शन में युवा ब्रिगेड ने देशभर में समाज तथा धर्म जागृति का कार्य किया है । उन्होंने युवकों में राष्ट्रभक्ति एवं सेवाभाव निर्माण किया है । संपूर्ण राज्य में सैकडों मंदिरों का जीर्णोद्धार हुआ । अनेक मंदिरों के समीप पानी के कुंड तथा अनेक नदियों की स्वच्छता की । युवा ब्रिगेड के युवक नई पीढी को धर्म से जोडने तथा ‘विश्वगुरु भारत’ इस ध्येय के लिए ‘युवा ब्रिगेड’ बडा योगदान दे रही है ।
७. ‘भगिनी निवेदिता प्रतिष्ठान’ के माध्यम से ‘लव जिहाद’ विरोधी जागृति अभियान
भगिनी निवेदिता प्रतिष्ठान के माध्यम से सैकडों महिला राष्ट्रजागृति का कार्य कर रही हैं । उन्होंने ‘लव जिहाद’ की भीषणता पर अनेक जिलों में जागृति अभियान चलाए हैं । बच्चों तथा महिलाओं को त्योहारों का महत्त्व समझाकर बताया जाता है ।
८. ‘अमृत कुंभ’ विभाग
इस विभाग के माध्यम से बुद्ध, बसव, डॉ. आंबेडकर तथा वीर सावरकर जैसे महान व्यक्तियों के विचार लोगों तक पहुंचाए जा रहे हैं ।
९. लेखन तथा प्रकाशन कार्य
चक्रवर्ती सुलीबेले ने राष्ट्र एवं हिन्दू धर्मविषयी अनेक पुस्तकें लिखी हैं । ‘राईट फैक्ट’ स्तंभ द्वारा वे प्रतिमाह एक पुस्तक प्रकाशित करते हैं । उनके विविध विषयों पर लेख नियमितरूप से दैनिक ‘विजयवाणी’ और ‘होस दिगंत’ जैसे प्रमुख समाचारपत्रों में प्रकाशित होते हैं । वे युवा लेखकों को मार्गदर्शन भी करते हैं ।
१०. स्वराज्य अभियान एवं मंदिर पुनरुज्जीवन
अ. भारत की स्वतंत्रता के ७५ वें वर्ष के अवसर पर ‘स्वराज्य के ८५ वर्ष – मुक्कालु नूर’ उपक्रम के अंतर्गत उन्होंने ७५ प्राचीन मंदिर स्वच्छ करने का संकल्प किया था । ‘युवा ब्रिगेड’ ने कर्नाटक में १५० से भी अधिक मंदिर एक दिन में स्वच्छ किए ।
आ. गोसाई घाट पर श्रीराममंदिर जीर्ण अवस्था में था । स्थानीय नागरिकों की विनती पर ‘युवा ब्रिगेड’ ने उसका जीर्णोद्धार किया । इस मंदिर में श्रीरामासहित विभीषण तथा शबरी की मूर्तियों की प्रतिष्ठापना की गई है ।
युवकों को राष्ट्र-धर्म कार्य में जोडकर सक्रिय करने के लिए ‘युवा ब्रिगेड’ द्वारा किए गए विविध उपक्रम !
१. युवकों द्वारा २५० मंदिरों के जलाशय अथवा ताल स्वच्छ किए गए !

स्वामी विवेकानंद कहते हैं, ‘जो अनेक युवकों को आकर्षित करता है, ऐसा राष्ट्रप्रेम एक बडा माध्यम है ।’ इस अनुषंग से हमने एक कार्यक्रम का आयोजन किया, उसका नाम था ‘जागो भारत’ । उसमें हमने गायन करनेवाले तथा व्याख्यान देनेवालों को एकत्र कर, एक कार्यक्रम कर्नाटक के प्रत्येक महाविद्यालय में किया । इसका परिणाम यह हुआ कि महाविद्यालय में उस कार्यक्रम को देखने के पश्चात बहुत से युवक हमारे पास आने लगे । इन युवकों को इस कार्य में जोड लिया, जिसका आधार धर्म होगा । ऐसे युवकों से कर्नाटक के २५० मंदिरों के जलाशय अथवा ताल स्वच्छ करने का कार्य करवाया ।
२. कर्नाटक की १० नदियों की ‘जलजीवन’ अभियान के माध्यम से की गई थी स्वच्छता !

दूसरे चरण में हमने नदियों की स्वच्छता की । उस कार्य को ‘जलजीवन’ नाम दिया । हमने संपूर्ण कर्नाटक में ऐसी १० नदियों की स्वच्छता की । प्रथम हमारे कार्यकर्ता वहां जाते हैं । फिर स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सहायता लेते थे ।
हमारे कार्यकर्ता नदी में उतर कर वहां लोगों द्वारा फेंका गया कचरा एकत्र कर बाहर फेंकते थे । यह देख वहां के स्थानीय युवक भी आ जाते । वे हमारा कार्य देखकर कहते, ‘‘हम प्रतिवर्ष यह नदी स्वच्छ करने का कार्य करेंगे ।’’ इस प्रकार उनके मन में यह भावना जागृत हुई कि ‘हम युवकों को एकत्र आकर वह नदी स्वच्छ रखनी है !’ हम केवल नदी की स्वच्छता कर नहीं लौट आते, अपितु नदी की स्वच्छता पूर्ण होने के पश्चात हम वहां नदी की आरती करते । आरती करते समय हमने उन्हें बताया, ‘‘ऐसी ही गंगा आरती काशी में होती है, उसे आपने देखा होगा । अपने मैसुरू के निकट नंजनगुडू में हम प्रतिवर्ष ‘कपिला आरती’ करते हैं ।’’ वहां के स्थानीय कार्यकर्ता जो पहले हमसे जुडे नहीं थे, वे ही अब वहां का समस्त कार्य स्वयं ही कर रहे हैं । इसके साथ ही स्वप्रेरणा से वहां के मंदिर तथा नदी स्वच्छ करते हैं । तदुपरांत प्रतिवर्ष ऐसी आरती करने का प्रयत्न करते हैं । इस प्रकार कर्नाटक में ५ से अधिक नदियों की प्रतिवर्ष स्वच्छता की जाती है तथा प्रतिवर्ष ऐसी ही आरती की जाती है, यह एक अत्यंत विशेष बात है ।

३. मंदिरों की स्वच्छता करना
अनेक लोग कहते हैं, ‘‘अमुक मंदिर अस्वच्छ है, वहां का परिसर बहुत गंदा है ।’’ तदुपरांत हम वहां जाकर उस मंदिर को संपूर्णरूप से स्वच्छ कर वहां के कार्यकर्ताओं के हाथों सौंपकर उनसे कहते, ‘‘अब से आपको यह मंदिर हमेशा स्वच्छ रखना है । यदि कोई कहेगा कि हिन्दू अपने मंदिर में स्वच्छता नहीं रखते । तो उन्हें दिखाएंगे कि हमारे मंदिर स्वच्छ हैं । आप ऐसा नहीं कह सकते !’’ इस प्रकार मंदिर स्वच्छता में युवकों को सम्मिलित करने के पश्चात वे सभी युवक तथा मंदिर में कार्य करनेवाले कर्मचारी हमसे जुड गए । नए युवक मंदिर स्वच्छता के माध्यम से हमसे जुड गए ।
४. ‘विवेक ज्योति यात्रा अभियान’ के माध्यम से जातिभेद मिटाने और ‘पदयात्रा अभियान’ के माध्यम से धर्मांतर रोकने का प्रयत्न
आगे हमने ऐसा विचार किया कि जातिभेद की शृंखला तोडनी है, तो कोई बडा उपक्रम करना होगा । तदुपरांत जो-जो कार्यकर्ता हमें मिले उन सभी को लेकर हमने कर्नाटक में एक पदयात्रा निकाली । अपने-अपने जिले में जहां-जहां धर्मांतर किया जाता था, उस गांव के कार्यकर्ता पदयात्रा में सम्मिलित होते थे । हम नए-नए धर्मांतरित हुए लोगों के घर जाकर उनसे मिलने लगे । उन्हें विश्वास दिलाते कि ‘आप अब भी हिन्दू ही हैं । हम आपके साथ हैं । आप स्वयं धर्मांतर न करें ।’
अब हमने जो हमारे साथ हैं उन्हें पकड कर रखा है, इसलिए हमने ‘पदयात्रा अभियान’ आरंभ किया । हम ‘विवेक ज्योति यात्रा अभियान’ के माध्यम से ‘पिछडी जाति’ के लोगों के घर जाकर उनके साथ भोजन के लिए बैठते । उनके साथ भोजन करना, भजन गाना, इस प्रकार उनके साथ घुल-मिलकर कार्यक्रम करने लगे । ऐसे कार्यक्रम हमने अनेक स्थानों पर किए ।
५. ‘लव जिहाद’ के विरोध में कार्य
अब हमने विचार किया है कि आगे हम ‘लव जिहाद’के संदर्भ में कुछ करेंगे ! ‘लव जिहाद’ के विरोध में हमने भीतपत्रक (पोस्टर्स) बनाए हैं । हमने अनेक हिन्दू युवतियों को प्रशिक्षण दिया है तथा प्रत्येक स्थान पर जहां भी कोई कार्यक्रम हो रहा हो, वहां ‘लव जिहाद’के विषय में प्रबोधन करने के लिए एक प्रदर्शन लगाया जाता है । प्रशिक्षित युवतियां इस प्रदर्शन में आनेवाली महिलाएं, लडकियां एवं जो भी पुरुष वर्ग वहां आता, उन्हें इस विषय में प्रबोधन करती हैं कि ‘भारत में लव जिहाद किस प्रकार चल रहा है ? हमें उससे कैसे दूर रहना चाहिए ? अपनी रक्षा कैसे करनी चाहिए ?’
( और इनकी सुने …) ‘क्या सरकार अब भा.ज.पा. की ही भूमिका अपना रही है ?’ – Udhayanidhi Stalin
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