‘साधना की तीव्र लगन एवं सेवाभावी वृत्ति’ से युक्त नांदेड की श्रीमती अनीता बरारा (आयु ७२ वर्ष) ७१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त कर ‘समष्टि संत’ के रूप में सनातन के १३८वें संतपद पर विराजमान !                                                       

श्रीमती बरारा में सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी के प्रति दृढ श्रद्धा है । वे गुरुदेवजी का स्मरण करती हैं । वे कर्तापन गुरुदेवजी को अर्पण करती हैं । वे निरंतर कहती हैं, ‘सबकुछ गुरुदेवजी ही करते हैं ।’

आध्यात्मिक स्तर पर मार्गदर्शन कर साधक को अगले स्तर तक ले जानेवाली श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी !

‘‘सनातन संस्था तथा आप अलग नहीं हैं । आप एक ही हैं ।’’ उनकी बातें सुनकर मेरे अंतर्मन में श्री गुरुदेवजी ने मेरे मन में आए पहले विचार में जो अधूरापन था, उसका भान दिलाया ।

अखंड सेवारत श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी

गुरुसेवा तो श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी की सांस है । केवल कुछ ही घंटे विश्राम कर वे दिन-रात गुरुसेवा में लीन रहती हैं ।

अष्टलक्ष्मियों की स्वरूपिणी होने की अनुभूति करानेवालीं श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी !

अष्टलक्ष्मियों के ८ रूपों का आध्यात्मिक रहस्य, साथ ही मैं ‘इन आठों तत्त्वों के उन्हीं में (श्रीसत्शक्ति [श्रीमती] बिंदा नीलेश सिंगबाळजी में) कार्यरत होने की अनुभूति कैसे कर पाई ?’, इसे मैं कृतज्ञभाव से उनके चरणकमलों में समर्पित कर रही हूं ।

जळगांव भ्रमण के समय श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी के दैवीय अस्तित्व की साधकों को हुई प्रतीति !

श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) सिंगबाळजी जळगांव सेवाकेंद्र के लिए ली गई भूमि देखने नांद्रा गांव में गई थीं । वहां उन्होंने भूमिपूजन किया ।

निरंतर गुरुसेवा का ध्यास होनेवाली रत्नागिरी की श्रीमती अंजली हनुमंत करंबेळकर सनातन की १३३वें (समष्टि) संतपद पर विराजमान

सनातन की धर्मप्रचारक सद्गुरु स्वाती खाडयेजी ने यहां की सनातन की साधिका श्रीमती अंजली हनुमंत करंबेळकर (आयु ६८ वर्ष) के १३३वें (समष्टि) संतपद पर विराजमान होने का शुभ समाचार दिया ।

निरंतर शिष्यभाव में रहनेवाले तथा कर्तापन न लेनेवाले सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी (आयु ५८ वर्ष) !

सद्गुरु पिंगळेजी सदैव कहते रहते हैं, ‘मैं एक कठपुतली हूं तथा मेरे माध्यम से बोलनेवाले मेरे गुरुदेवजी ही हैं ।

देवताओं की भावविभोर करनेवाली मूर्तियां बनानेवाले कर्नाटक के सिद्धहस्त पंचशिल्पकार पूज्य काशीनाथ कवटेकरजी !

पूज्य गुरुजी की साधना एवं शिल्पकला को दिया उनका योगदान कर्नाटक की शिल्पकला परंपरा में सदैव संस्मरणीय रहेगा । पूज्य काशीनाथ कवटेकरजी की आध्यात्मिक साधना एवं भगवान पर उनकी अपार श्रद्धा के कारण ही सनातन संस्था ने वर्ष २०२३ में उन्हें ‘संत’ घोषित किया ।

तपोभूमि, कुंडई (गोवा) के पद्मश्री सद्गुरु ब्रह्मेशानंदाचार्य स्वामी !

सद्गुरु ब्रह्मेशानंदाचार्यजी विश्व शांति तथा सामंजस्य के माध्यम से संसार को एक साथ लाने के लिए पूरे विश्व में कार्य करनेवाले ‘इंटरनेशनल सद्गुरु फाउंडेशन’ के प्रमुख संस्थापक हैं । वर्तमान में वे सहस्त्रों वर्षों की अमर गुरु-शिष्य परंपरा के ‘श्री दत्त पद्मनाभ पीठ, गोवा’ (भारत) संस्था के पीठाधीश हैं ।

विश्व स्तर के आदरणीय आध्यात्मिक नेता तथा ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक श्री श्री रविशंकरजी !

श्री श्री रविशंकरजी विश्व स्तर के आदरणीय आध्यात्मिक एवं मानवतावादी नेता हैं । उन्होंने तनावमुक्त एवं हिंसाचारमुक्त समाज के निर्माण हेतु वैश्विक आंदोलन का अभूतपूर्व नेतृत्व किया है ।