राजस्थान में अनुसूचित जाति के लोगों के लिए निःशुल्क आयुर्वेदिक चिकित्सा शिविर का आयोजन !

जब ऐसे शिविर सभी के लिए उपयुक्त हैं, तो फिर वो सभी के लिए क्यों नहीं आयोजित किए जाते हैं ?

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार

सच्चिदानंद ईश्वर की प्राप्ति कैसे करें, यह अध्यात्मशास्त्र बताता है । इसके विपरीत ‘ईश्वर हैं ही नहीं’, ऐसा कुछ विज्ञानवादी अर्थात बुद्धिप्रमाणवादी चीख-चीखकर कहते हैं !

कालमेघ वनस्पति और विकारों में उसके उपयोग

कालमेघ वनस्पति संक्रामक रोगों के लिए अत्यंत उपयुक्त है । यह बहुत ही कडवी होती है । इसका उपयोग ज्वर और कृमियों के लिए किया जाता है । यह सारक (पेट को साफ करनेवाली) होने से कुछ स्थानों पर वर्षा ऋतु में और उसके उपरांत आनेवाली शरद ऋतु में सप्ताह में एक बार इसका काढा पीने की प्रथा है । इससे शरीर स्वस्थ रहता है ।

सनातन संस्था द्वारा पूरे भारत में ‘ज्ञानशक्ति प्रसार अभियान’

ग्रंथों में सरल भाषा और संस्कृत श्लोकों का यथोचित उपयोग है तथा ये ग्रंथ दिव्य ज्ञानामृत ही हैं । ये ग्रंथ अपने मित्र, परिजन, कर्मचारियों को उपहार स्वरूप देने के लिए भी उपयुक्त हैं ।

सर्दियों मेंं होनेवाली बीमारियों पर सरल उपचार

‘सर्दियों में ऋतु के अनुसार ठंड और सूखापन बढता है। उनका उचित ध्यान न रखने से विविध बीमारियां होती हैं । उनमें से अधिकांश बीमारियां ‘तेल के उचित उपयोग और सेंक लेना’, इन उपचारों से नियंत्रण में आती हैं ।

छोटे बच्चों की रोगप्रतिरोधक शक्ति में वृद्धि होने हेतु आयुर्वेद के निम्न उपचार करें !

प्रत्येक अभिभावक के मन में छोटे बच्चों की रोगप्रतिरोधक शक्ति बढाने के विषय में जिज्ञासा रहती है । रोगप्रतिरोधक शक्ति अच्छी रहने के लिए शरीर का बल और पाचनशक्ति उत्तम होना आवश्यक है ।

पेट साफ होने के लिए रामबाण घरेलु औषधि : मेथीदाना

रात को सोने के पूर्व अथवा रात के भोजन के उपरांत आधा चम्मच मेथीदाना थोडे से पानी के साथ औषधि गोलियां निगलते हैं, उस प्रकार न चबाते हुए निगलें । इससे सवेरे उठने पर पेट स्वच्छ होता है ।

आगामी आपातकाल की तैयारी के रूप में, साथ ही सदैव के लिए स्वयं के घर में न्यूनतम २ – ३ तुलसी के पौधे लगाएं !

हिन्दू धर्म और आयुर्वेद में तुलसी को अत्यधिक महत्त्वपूर्ण बताया गया है । तुलसी में श्रीविष्णु तत्त्व होता है । धर्मशास्त्र कहता है कि ‘प्रत्येक घर में तुलसी होनी ही चाहिए ।’ तुलसी असंख्य विकारों में उपयोगी है ।

कोरोना का बुखार एवं उसके लिए किए जानेवाले आयुर्वेदीय उपचार

बुखार आना आरंभ होने पर लंघन करें (भूखे रहें), बुखार में पाचनशक्ति बढानेवाली औषधियां दें, बुखार उतरना आरंभ हो, तो समूल नष्ट होने तक औषधि दें और बुखार आना पूर्णरूप से रुकने पर विरेचन (दस्त की औषधि) दें, ऐसा बताया गया है ।

कोरोना रोगियों के लिए गुणकारी प्रमाणित अश्वगंधा औषधि पर ब्रिटेन में शोधकार्य !

कहां आधुनिक चिकित्सकीय शास्त्र को श्रेष्ठ मानकर आयुर्वेद को न्यून माननेवाले भारत के कथित विज्ञानवादी, तो कहां आयुर्वेद पर शोधकार्य कर उसका लाभ अपने देश को कराने का प्रयास करनेवाला ब्रिटेन !