वजन बढना एवं स्त्रीरोग : आयुर्वेद का दृष्टिकोण

वर्तमान आधुनिक जीवनशैली में स्त्रियों में वजन बढने की समस्या गति से बढती हुई दिखाई दे रही है । यह समस्या केवल बाह्य सौंदर्य तक सीमित नहीं है, अपितु वह स्त्रियों के स्वास्थ्य पर तथा विशेषकर स्त्रीरोगों के बढने का बडा कारण बन रही है ।

अनियमित मासिक धर्म एवं आयुर्वेद

मासिक धर्म यदि समय पर, पीडामुक्त तथा उचित मात्रा में न आता हो, तो शरीर में कुछ तो असंतुलन होने का वह संकेत होता है । परिवर्तित जीवनशैली, अनियमित आहार, नींद का अभाव तथा ‘हार्मोनल’ (संप्रेरक) परिवर्तनों के कारण यह समस्या बढती हुई दिखाई देती है ।

उपवास का शास्त्र

उपवास में मन के साथ अन्य इंद्रियों पर रखा जानेवाला कठिन संयम सीखने को मिलता है । ऐसे जितेंद्रिय व्यक्ति को बडी सहजता से अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है ।

जहां चिकित्सकीय उपकरणों का बाजारीकरण हो रहा है, ऐसे में औषधीय चिकित्सा के साथ ही धर्माचरण एवं साधना ही स्वस्थ जीवन का रहस्य है, इसकी हुई प्रतीति !

रोगी का चिकित्सालय की सुख-सुविधाएं एवं मार्गदर्शन, तथाकथित निर्मित आपातकालीन स्थिति, साथ ही बीमा प्रतिष्ठानों द्वारा चिकित्सकीय उपचारों के खर्च का भुगतान करना इत्यादि लालच के अधीन हो जाते है

Patanjali Ayurveda Hospital : पतंजलि आयुर्वेद चिकित्सालय में अब विभिन्न रोगों पर होंगे उपचार

शीघ्र ही एम्स, टाटा कैंसर चिकित्सालय एवं सर गंगाराम चिकित्सालय के सहयोग से पतंजलि आयुर्वेद चिकित्सालय में विभिन्न रोगों पर आधुनिक पद्धतियों का उपयोग कर उपचार किए जाएंगे ।

ताजमहाल के चारों ओर लगाए गए ८० सहस्र तुलसी के पौधे  !

‘सूर्यनमस्कार इस्लामविरोधी है’, ऐेसा कहते हुए अंतरराष्ट्रीय योग दिन को विरोध करनेवाले लोगों को क्या हिन्दुओं की पवित्र तुलसी स्वीकार है ?

सांप्रत काल में ‘श्री महाधन्वंतरि याग’ की आवश्यकता तथा इस याग से होनेवाले लाभ !

बीज, घास, लकडी, फूल, पेड, फल, वृक्ष, जडें, पत्ते, तना, लासा, रस एवं गंध’, इनमें से ‘वनस्पति के किस रूप में संबंधित बीमारी का निवारण छिपा है’, इसका विश्व को ज्ञान देनेवाले देवता हैं श्री धन्वंतरि देवता !

बाल झडने के विविध कारण तथा उनके लिए उपचार

वर्तमान समय में समाज में अनेक लोगों की बालों की समस्याएं बहुत बढ गई हैं । उसके लिए हम बहुत पैसा खर्च करते हैं; परंतु महंगे उपचार लेकर भी हमें अपेक्षित लाभ नहीं मिलता ।

किसी भी ‘पैथी’ का ‘स्व-उपचार’ न करें !

एक घटना मथुरा में हुई । एक ३२ वर्षीय नवयुवक ने पेटदर्द के इलाज के लिए स्वयं अपनी ही शस्त्रक्रिया (सर्जरी) कर ली !

‘गुइलेन बैरे सिंड्रोम’ (जी.बी.एस.) के लिए पंचगव्य-ओजोन चिकित्सा : एक प्रभावी विकल्प !

विगत कुछ वर्षाें में पुणे के वैद्य दिलीप कुलकर्णी तथा अन्य कुछ आयुर्वेदाचार्याें ने पंचगव्य चिकित्सा एवं ओजोन का कैंसर, मधुमेह, चर्मरोग तथा तंत्रिका तंत्र की बीमारियों के उपचार के लिए सफलतापूर्वक उपयोग किया है ।