नागपंचमी

नागपंचमी के दिन हलदी से अथवा रक्तचंदन से एक पीढे पर नवनागों की आकृतियां बनाते हैं एवं उनकी पूजा कर दूध एवं खीलों का नैवेद्य चढाते हैं । नवनाग पवित्रकों के नौ प्रमुख समूह हैं । पवित्रक अर्थात सूक्ष्मातिसूक्ष्म दैवी कण (चैतन्यक) ।

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स्वभावदोष (षड्रिपु)-निर्मूलनका महत्त्व एवं गुण-संवर्धन प्रक्रिया (अंग्रेजी), नामजप का महत्त्व (अंग्रेजी), त्योहार मनानेकी उचित पद्धतियां एवं अध्यात्मशास्त्र (हिन्दी)

अक्षय तृतीया के पर्व पर ‘सत्पात्र को दान’ देकर ‘अक्षय दान’ का फल प्राप्त करें !

हिन्दू धर्म के साढे तीन शुभमुहूर्ताें में से वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया एक है । इसीलिए इसे ‘अक्षय तृतीया’ कहते हैं । इस तिथि पर कोई भी समय शुभमुहूर्त ही होता है । इस वर्ष ३ मई २०२२ को अक्षय तृतीया हैं ।

तृतीय विश्व युद्ध के दुष्प्रभाव से बचने का एक प्रभावी माध्यम है, नियमित अग्निहोत्र करना – श्री. शंभू गवारे, पूर्व एवं पूर्वोत्तर भारत राज्य समन्वयक, हिन्दू जनजागृति समिति

‘अग्निहोत्र’ प्रदूषण नष्ट कर वातावरण को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करती है । जो व्यक्ति यह पवित्र अग्निहोत्र विधि करते हैं, उनका तनाव कम होता है, ऊर्जा बढती है, ऐसे कई लाभ होते हैं । अग्निहोत्र की राख पौधों में डालने से भी लाभ होता है ।

गुडी पडवा है संकल्पशक्ति के मुहूर्त का प्रतीक !

गुडी पडवा हिन्दुओं का एक महत्त्वपूर्ण त्योहार है । इस दिन से हिन्दुओं का नववर्ष का आरंभ होता है । इस दिन पृथ्वीतल पर ब्रह्माजी एवं विष्णुजी का तत्त्व बडी मात्रा में कार्यरत होता है ।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सात्त्विक वातावरण में ब्रह्मध्वज पूजन कर नववर्ष का स्वागत करना आध्यात्मिक दृष्टि से लाभदायक !

‘यूनिवर्सल ऑरा स्कैनर’ और सूक्ष्म चित्रों के माध्यम से किए अध्ययन तथा सम्मिलित साधकों के व्यक्तिगत अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय पद्धति से ब्रह्मध्वज पूजन कर नववर्षारंभ मनाना आध्यात्मिक दृष्टि से लाभदायक है तथा पश्चिमी पद्धति से नववर्षारंभ मनाना हानिकारक है ।

श्रीराम नवमी तिथि : चैत्र शुक्ल ९ (१० अप्रैल)

श्रीराम के जन्म प्रीत्यर्थ श्रीराम नवमी मनाई जाती है । इस दिन जब पुष्य नक्षत्र पर, मध्यान्ह के समय, कर्क लग्न में सूर्यादि पांच ग्रह थे; तब अयोध्या में प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ । अनेक राममंदिरों में चैत्र शुक्ल १ से लेकर नौ दिन तक यह उत्सव चलता है ।

हनुमान जयंती

पंचमुखी हनुमान के पांच मुख हैं – गरुड, वराह, हयग्रीव, सिंह एवं कपिमुख । दशभुज मूर्तियोंके हाथोंमें ध्वज, खड्ग, पाश इत्यादि शस्त्र हैं । पंचमुखी देवता का अर्थ है पूर्व, पश्चिम, दक्षिण एवं उत्तर, ये चार दिशाएं एवं ऊर्ध्व दिशा, इन पांचों दिशाओं पर उनका स्वामित्व है ।

होली में होनेवाले अनाचारों पर प्रशासन कठोरता से रोक लगाए ! – हिन्दू जनजागृति समिति की मांग

होली, दुष्टप्रवृत्तियों एवं अमंगल विचारों का नाश कर, सत्य का मार्ग दिखानेवाला उत्सव है ! दुर्भाग्य से आजकल इस उत्सव को विकृत रूप प्राप्त हो गया है । इस दिन मुख पर कालिख पोतना, मद्य पीकर हुडदंग मचाना, कूडे की होली जलाना जैसे अनेक अधार्मिक और फूहड कार्य होते दिखाई देते हैं ।

लक्ष्मणपुरी (लखनऊ, उत्तर प्रदेश) में होली मनाने के लिए मस्जिदों ने बदला नमाज का समय !

हिन्दू त्योहारों के दिन, हिन्दुओं ने, मस्जिदों से पत्थर फेंकने या हिन्दुओं पर आक्रमण के समाचार अनेक बार पढे होंगे । किन्तु वर्तमान में, उत्तर प्रदेश में प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ, सनातन संस्कृति के पोषक, योगी माननीय आदित्यनाथ जी की सरकार होने के फलस्वरूप, अब ऐसे समाचार पढने को मिल रहे हैं !