भारतियों, पश्चिमी संस्कृति अनुसार १ जनवरी को नहीं, अपितु चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही नववर्षारंभ मनाएं !
चैत्र शुक्ल १ को आरंभ होनेवाला नए वर्ष का कालचक्र, विश्व के उत्पत्ति काल से संबंधित होने से सृष्टि में नवचेतना का संचार होता है । इसके विपरीत, ३१ दिसंबर की रात को १२ बजे आरंभ होनेवाले नए वर्ष का कालचक्र विश्व के लयकाल से संबंधित होता है ।