राजस्थान : ३८ गौशालाओं ने अधिक गोवंश दिखाकर हडपे करोडों रुपये के सरकारी अनुदान !

३८ गौशालाओं को ५७ करोड रुपये की वसूली का नोटिस 

जयपुर (राजस्थान) – यहां की ३८ गौशालाओं द्वारा वास्तविक संख्या से अधिक गोवंश दिखाकर करोडों रुपये का सरकारी अनुदान हडपने का चौंकानेवाला मामला राज्य के महालेखाकार (एजी) की रिपोर्ट में सामने आया है ।

इस रिपोर्ट के अनुसार :

१. कुछ गौशालाओं को मृत हो चुके या अनुदान अवधि के समय अस्तित्व में न रहनेवाले गोवंश के नाम पर भी फंड दिया गया ।

२. दैनिक गोवंश रिकॉर्ड एवं ‘भारत पशुधन’ पोर्टल पर उपलब्ध सूचना में भारी अंतर पाया गया । बिना उचित सत्यापन के ही अनुदान स्वीकृत किए जाने की बात रिपोर्ट में प्रविष्ट है ।

३. ३८ गौशालाओं ने अपने आवेदनों में वास्तविक संख्या से १ लाख ३१ सहस्र अधिक गोवंश दर्शाए । रिपोर्ट के अनुसार, बडे गोवंश के लिए प्रतिदिन ४० रुपये एवं छोटे गोवंश के लिए २० रुपये के अनुसार अतिरिक्त धनराशि का वितरण किया गया ।

बडी गौशालाओं पर आरोप

रिपोर्ट में उल्लेख है कि जयपुर की पिंजरापोल गौशाला को १ करोड ८१ लाख रुपये, जबकि हिंगोनिया गौशाला को १ करोड ४१ लाख रुपये का अतिरिक्त अनुदान मिला ।
इसके साथ ही, डीग जिले की श्री ब्रज कामद सुरभि वन शोध संस्थान गौशाला को १६ करोड ३६ लाख रुपये एवं जालोर के पथमेडा हिला स्थित श्री गोपाल गोवर्धन गौशाला को १० करोड ९५ लाख रुपये का अतिरिक्त फंड दिए जाने का उल्लेख इस रिपोर्ट में किया गया है ।

वसूली का आदेश

महालेखाकार की रिपोर्ट सामने आने के उपरांत गोपालन विभाग ने संबंधित ३८ गौशालाओं से ५७.३६ करोड रुपये की वसूली करने का आदेश दिया है । हालांकि, तीन बार नोटिस जारी किए जाने के पश्चात भी अब तक बडी रकम वापस नहीं मिल पाई है ।

गौशाला संचालकों ने आरोपों को अस्वीकार किया

दूसरी ओर, गौशाला संचालकों ने इन आरोपों को सिरे से निरस्त कर दिया है । उनका कहना है कि यह फर्जी अनुदान का मामला नहीं है, अपितु कागदपत्रों (दस्तावेजों) एवं रिकॉर्ड (रजिस्टर) में लिपिकीय त्रुटि (गलती) है । इस संबंध में जरूरी दस्तावेज जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत कर दिए गए हैं एवं जांच के पश्चात सच सामने आ जाएगा ।

संपादकीय भूमिका

सरकार को ऐसी गौशालाओं की मान्यता ही निरस्त कर देनी चाहिए !