PM Narendra Modi : नक्सलवाद अब १२५ जनपदों से घटकर केवल २० जनपदों तक सीमित रह गया है !

प्रधानमंत्री मोदी का लाल किले से १५ अगस्त के अवसर पर संबोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली – एक समय ऐसा था जब १२५ से अधिक जनपदों में नक्सलवाद की जड़ें गहरी हो चुकी थीं । हमारे आदिवासी क्षेत्र एवं युवा वर्ग माओवाद के जाल में फंसे हुए थे । आज वही नक्सलवाद केवल २० जनपदों तक सीमित रह गया है – ऐसा स्पष्ट वक्तव्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ७९वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए किया ।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तुत किये गए महत्त्वपूर्ण सूत्र :

१. एक समय ऐसा था जब छत्तीसगढ के बस्तर का नाम आते ही नक्सलवाद, माओवाद, बमविस्फोट एवं बंदूकों की ध्वनि स्मरण होती थी । आज वही बस्तर नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है, तथा वहां के युवा अब ओलम्पिक में भाग ले रहे हैं । जब सहस्रों युवा ‘भारत माता की जय’ कहते हुए क्रीड़ा क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, तब सम्पूर्ण वातावरण उत्साह से भर जाता है ।

२. एक समय जो क्षेत्र ‘रेड कॉरिडॉर’ (लाल गलियारा) के रूप में जाना जाता था, वह अब विकास का ‘ग्रीन कॉरिडॉर’ (हरित गलियारा) बन गया है ।

३. भारत के मानचित्र में जहां कभी रक्त से सना हुआ लाल क्षेत्र दिखता था, आज वहां हमने संविधान, कानून एवं विकास का तिरंगा फहरा दिया है ।

भगवान बिरसा मुंडा की १५०वीं जयन्ती वर्ष में यह सच्ची श्रद्धांजलि !

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की १५०वीं जयन्ती का वर्ष है । इन आदिवासी क्षेत्रों को नक्सलवाद से मुक्त कर, युवाओं के प्राणों की रक्षा कर हमने बिरसा मुंडा को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है ।

भगवान बिरसा मुंडा कौन थे ?

भगवान बिरसा मुंडा (१८७५–१९००) एक क्रान्तिकारी, आदिवासी नेता एवं जननायक थे । उनका जन्म तत्कालीन बंगाल प्रेसिडेन्सी (वर्तमान झारखंड राज्य) में हुआ था । उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक बड़ा आंदोलन संगठित किया था । आदिवासी समाज उन्हें भगवान के रूप में पूजता है ।

संपादकीय भूमिका

मोदी शासन ने गत ११ वर्षों में नक्सलवाद पर उत्तम प्रकार से नियंत्रण प्राप्त किया है । ग्रामीण तथा शहरी – दोनों प्रकार के नक्सलवाद पर लगाम कसने का यह प्रयास अभिनंदनीय ही है । निस्संदेह, इस सम्पूर्ण समस्या के मूल में जो साम्यवाद है, उसे १०० से अधिक वर्षों की ‘इकोसिस्टम’ (परिसंस्कृति) का अनुभव है । अतः अब सरकार तथा हिन्दू जनता को कहीं भी रुके बिना, धर्म तथा राष्ट्र के मूल पर आघात करने वाले साम्यवाद का पूर्णतः उन्मूलन करना आवश्यक है !