धर्मांधों द्वारा पथराव के लिए ५०० से १ सहस्र रुपए, जबकि पेट्रोल बम फेंकनेवाले को ५ सहस्र रुपए दिए गए थे
धर्मांधों को किन लोगों से पैसे प्राप्त हुए थे, इसकी भी छानबीन होनी चाहिए !
धर्मांधों को किन लोगों से पैसे प्राप्त हुए थे, इसकी भी छानबीन होनी चाहिए !
मुसलमानों को भीड द्वारा मारे जाने पर हिन्दुओं को असहिष्णु कहनेवाले धर्मनिरपेक्षतावादी और आधुनिकतावादी अब कहां हैं ? ऐसी घटनाओं का होना हिन्दू राष्ट्र के निर्माण को अपरिहार्य बना देता है !
हत्याकांड के कट्टरपंथियों को शरीयत कानून के अंतर्गत हाथ-पैर तोडने की या भरे चौक में बांधकर उनपर पत्थर फेंकने की सजा की कोई मांग करे, तो आश्चर्य न होगा !
जब हिन्दुओं और हिन्दुत्व के लिए प्रतिकूल समय था, तब अनेक राष्ट्रविरोधी शक्तियों ने उसमें अपने हाथ धो लिए । अब उसका दंड भुगतने का समय आ गया है; क्योंकि आज के समय में हिन्दुओं, हिन्दुत्व और हिन्दू राष्ट्र के लिए अनुकूल समय बडी तीव्र गति से आ रहा है ।
हिन्दुओ ने ‘संविधानात्मक दृष्टि से हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करेंगे’, ऐसा उद्घोष करनेपर उसका विरोध करनेवाली धर्मनिरपेक्षतावादियों की टोली अब मौन क्यों ? हिन्दुओं को वैध मार्ग से ऐसे लोगों को प्रश्न पूछना चाहिए !
उत्तरप्रदेश में लव जिहाद कानून अस्तित्व में है; परंतु वहां की मुसलमान पुलिस ‘लव जिहादी’ होने से वही हिन्दू लडकियों को यदि फंसा रही हो, तो हिन्दू युवतियां किससे न्याय मांगें ? ऐसी पुलिस को फांसी का दंड देने की मांग हिन्दू यदि करे तो इसमें अनुचित क्या है ?
अल्पसंख्यक हैं, परंतु अपराध के क्षेत्र में बहुसंख्यक !
गढवा (झारखंड) के एक विद्यालय में ७५ प्रतिशत मुसलमान विद्यार्थी हैं । इसलिए पाठशाला में इस्लामी नियम लागू करने के लिए मुसलमानों ने प्रधानाध्यापक पर दबाव डाला, तथा विद्यार्थियों को हाथ जोडकर प्रार्थना करने से रोका । क्या ‘जमियत-उलेमा-ए-हिन्द’ ने कभी इसके विरुद्ध याचिका प्रविष्ट की है ?
इमरान खान नाम के एक मुस्लिम युवक ने एक हिंदू लड़की को स्वयं ‘सुरेंद्र सिंह’ बताकर प्रेम के जाल में फंसाया । उसका धर्म परिवर्तन कर उससे विवाह किया ।
ऐसे प्रकरणों में उत्तर प्रदेश पुलिस का निष्क्रिय होना अत्यंत लज्जास्पद है ! सरकार ऐसी गंभीर घटनाओं के प्रति असंवेदनशील पुलिस अधिकारियों को सेवामुक्त क्यों नहीं करती ?