पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन ‘दावत-ए-इस्लामी’ के साथ २५ राज्यों के ३०० लोगों का संपर्क !
हिन्दुओं को जड से उखाड फेंकने की मानसिकता रखनेवाले इस जिहादी आतंकवाद को नष्ट करने के लिए अब ‘हिन्दू राष्ट्र’ ही एकमात्र विकल्प रह गया है, यह समझ लें !
हिन्दुओं को जड से उखाड फेंकने की मानसिकता रखनेवाले इस जिहादी आतंकवाद को नष्ट करने के लिए अब ‘हिन्दू राष्ट्र’ ही एकमात्र विकल्प रह गया है, यह समझ लें !
‘हिन्दू संगठित हो जाएं तो वो क्या नहीं कर सकते ?, यह इसका उदाहरण है ! यदि कोई कहे, ‘इस प्रकार से हिन्दुओं पर आक्रमण करने वालों को सबक सिखाना आवश्यक है’, तो क्या गलत है ?
यदि ऐसा है, तो पूरे देश में जहां अधिकांश छात्र हिन्दू हैं, गुरुवार को अवकाश घोषित करें ! रविवार का साप्ताहिक अवकाश भारत में ईसाई अंग्रेज़ों द्वारा लाई गई परंपरा है !
बांग्लादेश में ऐसा कुछ होने से पूर्व ही भारत सरकार को वहां स्थित शेख हसीना सरकार को जबाब उत्तर पूछना चाहिए ! यदि भारत सरकार निष्क्रिय रहती है और कोई आरोप लगाए कि बांग्लादेश में हिन्दुओं के नरसंहार के लिए एक प्रकार से भारत सरकार ही उत्तरदायी है, तो इसमें भूल कैसी ?
ऐसे विघातक प्रशिक्षण केंद्र का पता न लगना पुलिस के लिए अत्यंत लज्जास्पद है ! ‘पुलिस को इस बात का पता नहीं लगा या उसने अनदेखा किया ? , इस बिंदु का भी अन्वेषण होना चाहिए एवं वास्तविकता उजागर होनी चाहिए !
जिहादी संगठन के लिए भारत में इस प्रकार धन इकट्ठा किया जाता है । तब सुरक्षातंत्र को इसके विषय में कुछ भी ज्ञात न होना, लज्जाजनक ! आतंकवादी संगठन के लिए पैसे मांगनेवाले और उसके लिए पैसे देनेवाले, ऐसे सभी लोगों पर कठोर कार्रवाई होना आवश्यक !
अल्पसंख्यक कहलाने वाले धर्मांध, अपराध के क्षेत्र में बहुसंख्यक होते हैं, यह ध्यान में लें !
ऐसे लोगों को, खाडी देशों में जिस प्रकार शरीयतनुसार कमर तक गड्ढे में गाडकर उन्हें पत्थर मारकर उनकी जीवनलीला समाप्त कर दी जाती है, यदि कोई वैसा दंड देने की मांग करे, तो क्या आश्चर्य ?
आरोपियों को तत्काल दण्ड देने के लिए सरकारी यन्त्रणा से सख्त प्रयत्न न होने से ही हिन्दुओं को ऐसी चेतावनी देनी पडती है । यह सरकारी यन्त्रणा को लज्जास्पद ! सरकार अभी तो हत्त्या हुए सभी हिन्दुत्वनिष्ठों के हत्त्यारों को शीघ्र दण्ड देने के लिए प्रयत्न करेंगी क्या ?
हिन्दू विरोधी चित्रकार एम.एफ. हुसैन द्वारा हिन्दू देवी-देवताओं की अश्लील और नग्न चित्र चित्रित किए जाने के उपरांत देश भर में १२,०० शिकायतें प्रविष्ट की गईं, जबकि ५ स्थानों पर अपराध प्रविष्ट किए गए। जनता यह नहीं भूली है कि उस समय देहली में याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई हुई थी !