केरल में ‘बंद’ हुआ हिंसक !
‘केरल में माकप गठबंधन की सरकार होते हुए उसने यह हिंसाचार क्यों नहीं रोका ?’, इसका उत्तर देना चाहिए !
‘केरल में माकप गठबंधन की सरकार होते हुए उसने यह हिंसाचार क्यों नहीं रोका ?’, इसका उत्तर देना चाहिए !
केरल में पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा २३ सितंबर को किए बंद के समय हुई हिंसा की केरल उच्च न्यायालय ने स्वयं ध्यान देते हुए कहा कि, ‘सार्वजनिक संपत्ति की हानि को सहन नहीं किया जा सकता’ । ‘इस प्रकार से कोई भी बंद नहीं कर सकता । यह बंद अवैध है’, ऐसा उच्च न्यायालय ने कहा है ।
यह मानवता को कालिख पोतनेवाली घटना है । इससे वासनांध धर्मांधों की पशुवृत्ति का आभास होता है !
जब हिन्दू युवती मुसलमान से विवाह करती है, तब उसे ‘प्रेमविवाह’ संबोधित कर उसका विरोध करनेवाले हिन्दुओं को घुट्टी पिलानेवाले निधर्मीवादियों को इस विषय में क्या कहना है ?
मंदिर में तोड फोड कर भगवा ध्वज जलाया
पुलिसकर्मियों पर कांच की बोतलों द्वारा आक्रमण
मुसलमान बहुसंख्यक होने पर क्या होता है, यह निधर्मीवादी जब समझ लेंगे वह सुदिन होगा !
धर्मांधों को बंदी बनाने के लिए जाने पर अधिकतर पुलिस पर आक्रमण होता ही है, इस विषय में कोई भी निधर्मीवादी पार्टी, नेता अथवा संगठन कभी मुंह नहीं खोलते !
अब तो हिन्दुत्व का पक्ष लनेवाले संवाददाता कोभी ऐसी धमकियां मिल रही हैं । सरकार को इसे ध्यान देते हुए संबंधितों के विरोध में ठोस कृति करना अत्यंत आवश्यक है !
इस्लामी देशों में शरीयत कानून के अंतर्गत ऐसे वासनांधों को कमर तक गड्ढे में गाढकर मृत्युदंड देते हैं, वैसा दंड देने की कोई मांग करे, तो आश्चर्य न हो !
भारत सरकार को इस आतंकवादी संगठन को सबक सिखाने के लिए कदम उठाने अत्यंत आवश्यक !