वैध प्रलेखों (दस्तावेजों) के न होने के कारण कार्रवाई
विधिक (कानूनी) पक्ष प्रस्तुत करने का भी अवसर नहीं
न्यूयॉर्क (अमेरिका) – अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वैध प्रलेखों के बिना निवास कर रहे १८ सहस्र भारतीय नागरिकों को अमेरिका से बाहर निकालने की सिद्धता (तैयारी) प्रारंभ कर दी है । संबंधित व्यक्तियों को अपना विधिक पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर भी प्राप्त नहीं होगा ।
🚨 𝐂𝐨𝐧𝐭𝐫𝐚𝐬𝐭 𝐭𝐡𝐚𝐭 𝐜𝐚𝐧𝐧𝐨𝐭 𝐛𝐞 𝐢𝐠𝐧𝐨𝐫𝐞𝐝!
The US is deporting around 18,000 undocumented Indian nationals, taking swift action against illegal immigration, with reports claiming they won't even get a chance to present a legal case. ✈️❌
𝐌𝐞𝐚𝐧𝐰𝐡𝐢𝐥𝐞,… pic.twitter.com/R9KnoH9Cwr
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) July 19, 2026
ऐसे व्यक्तियों को देश से बाहर भेजने के लिए पुनः सैन्य विमानों का उपयोग किया जाएगा । प्रलेखों के बिना निवास करने वालों की खोज के लिए शासकीय तंत्र विभिन्न स्थानों पर छापे मार रहा है । जिनके पास वैध प्रलेख नहीं हैं तथा जिन्हें सीमापार भेजा जाने वाला है, ऐसे प्रवासियों के लिए अल पासो एवं कैलिफ़ोर्निया में नये ‘निरोध केंद्र’ (डिटेंशन सेंटर) स्थापित किए गए हैं, जिन पर लगभग १६ सहस्र ५०० करोड भारतीय रुपयों का व्यय किया गया है । इन केंद्रों में लगभग १२ सहस्र प्रवासियों के रहने की अस्थायी व्यवस्था की गई है । अमेरिका के न्यूयॉर्क, टेक्सास, कैलिफ़ोर्निया एवं न्यू जर्सी में किए गए सर्वेक्षण में ऐसे भारतीय नागरिकों का जीवन अस्त-व्यस्त होने की बात सामने आई है । ‘निरोध केंद्रों’ में कुछ व्यक्तियों के साथ दुर्व्यवहार किए जाने की शिकायतें भी की गई हैं ।
वर्ष २०२५ में ३ सहस्र ५६७ भारतीयों को अमेरिका से निष्कासित किया गया था !
भारत के विदेश मंत्रालय की सूचना के अनुसार वर्ष २०२५ में अमेरिका से ३ सहस्र ५६७ भारतीय नागरिकों को निष्कासित किया गया था । जून २०२६ तक १ सहस्र ७६ भारतीय नागरिकों को भारत वापस भेजा जा चुका है ।
५ फरवरी २०२५ के दिन अमेरिका ने प्रथम बार सैन्य विमान से १०४ भारतीयों को अमृतसर भेजा था । इस समय अनेक लोगों को हथकडियां तथा पैरों में बेडियां लगाई गई थीं । इसके चित्र सम्मुख आने के पश्चात देशभर में विवाद उत्पन्न हो गया । संसद में भी कोलाहल हुआ था ।

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