Dabholkar Murder Case Verdict : झूठे आरोप लगाकर सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति के साथ धोखा किया गया ! – अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, सर्वोच्च न्यायालय

इस मामले में झूठे आरोप लगाकर सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति को फंसाया गया है । दोषी ठहराए गए कळसकर और अंदुरे भी मुंबई उच्च न्यायालय में निर्दोष प्रमाणित होंगे ।

Dabholkar Murder Case Verdict : (और इनकी सुनिए…) ‘मुख्य सूत्रधार के लिए राज्य सरकार को अपील करनी चाहिए !’ – शरद पवार

दाभोलकर की आत्मा को कुछ तो न्याय मिलना चाहिए । हत्यारों को दंड मिला होगा, तो भी मुख्य सूत्रधार छूट गया । इसके लिए राज्य सरकार को अपील करनी चाहिए ।

Dabholkar Murder Case Verdict : (और इनकी सुनिए…) ‘डॉ. दाभोलकर की हत्या के पीछे सनातन का हाथ है !’ – मिलिंद देशमुख, अनिस राज्य कार्यकारी सदस्य

२०१६ से मैं दाभोलकर हत्या मामले पर ध्यान रख रहा हूं। ज इस प्रसंग का परिणाम आया । वास्तव में जिन लोगों ने मारी थी, उन्हें दंड मिला, जबकि साक्ष्य (सबूतों) के अभाव में तीन लोगों को रिहा कर दिया गया है ।

Dabholkar Murder Case Verdict : ३ व्यक्तियों का निर्दोष मुक्त होना, यह विजय ही है ! – अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर, अध्यक्ष, हिन्दू विधिज्ञ परिषद

डॉ. वीरेंद्रसिंह तावडे निर्दोष मुक्त हुए हैं । उन पर सूत्रधार होने का आरोप था, वह न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया है । सीबीआई ने उन पर आतंकवादी कार्यवाहियां करने का आरोप लगाकर उन्हें दोषी सिद्ध करने का प्रयास किया था ।

Dabholkar Murder Case : डॉ. वीरेंद्रसिंह तावडे, अधिवक्ता संजीव पुनाळेकर और विक्रम भावे निर्दोष घोषित !

डॉ. वीरेंद्रसिंह तावडे, अधिवक्ता संजीव पुनाळेकर और विक्रम भावे को न्यायालय ने निर्दोष मुक्त किया, तो अन्य २ आरोपी सचिन अंदुरे और शरद कळसकर को न्यायालय ने दोषी ठहराया है ।

Dhabholkar Murder Case : बहुचर्चित डॉ. दाभोलकर हत्या प्रकरण में निर्णय १० म‌ई को आने की संभावना !

२० अगस्त २०१३ को यहां के महर्षि विठ्ठल रामजी शिंदे पुल पर ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या हो गई ।

क्या ‘सी.बी.आई.’ के पास की पिस्तौल से हत्या हुई ?

वामपंथियों की हिन्दुओं के विरुद्ध वर्षाें से चली आ रही अनेक स्तरों की लडाई तथा उनके द्वारा की गई सहस्रों हत्याओं को देखते हुए उक्त ४ वामपंथियों की हत्या का ठीकरा हिन्दुओं के सर पर फोडने के उनके अथक प्रयास इस बडी जांच में समाहित इस एक प्रकरण से भी समझ में आएंगे ।

दाभोलकर-पानसरे हत्या की भटकी हुई जांच की कथा

इस पुस्तक में समाहित ‘जांच का एक अनुत्तरित प्रश्न : पिस्तौल गई कहां ?’, इस एक ही अध्याय से इस जांच में हो रही सामान्य लोगों की भी समझ में आनेवाली त्रुटियां सामने आती हैं । इन जांच संस्थाओं की यह जांच देखकर अक्षरशः ‘हंसे या रोएं ?’, यही समझ में नहीं आता ।

वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव में ‘हलाल सर्टिफिकेशन : वैश्विक अर्थव्यवस्थापर आक्रमण’ एवं ‘हिन्दू राष्ट्र : आक्षेप एवं खण्डन’ इन ‘ई बुक’ का लोकार्पण तथा डॉ. अमित थडानी द्वारा ‘द रेशनलिस्ट मर्डर्स’ पुस्तक का लोकार्पण !

हिन्दू विधिज्ञ परिषद के संस्थापक सदस्य पू. (अधिवक्ता) सुरेश कुलकर्णीजी के करकमलों से इस पुस्तक का लोकार्पण हुआ । इस अवसर पर व्यासपीठ पर इस पुस्तक के लेखक डॉ. अमित थडानी, हिन्दू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर एवं अधिवक्ता पी. कृष्णमूर्ती उपस्थित थे ।