अपनी सहज बातचीत एवं सरल व्यवहार से भक्तों को सिखानेवाले प.पू. भक्तराज महाराजजी !
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा ‘गुरु से मिलने जाते समय भक्तों को मन में संदेह नहीं रखना चाहिए’, यह सिखाया जाना
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा ‘गुरु से मिलने जाते समय भक्तों को मन में संदेह नहीं रखना चाहिए’, यह सिखाया जाना
हमें रामनाथी आश्रम के समान सर्वत्र हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करनी है ।
समाज की युवतियों द्वारा ‘दुर्गादेवी ने केश खुले छोडे हैं’, ऐसा कहकर स्वयं के केश भी खुले छोडना
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा व्यष्टि स्तर पर साधकों के लिए किए गए उपचारों का अध्यात्मशास्त्रीय आधार
कोई भी शब्द उच्चारित किया जाए, तो उसके साथ उसकी शक्ति भी आती है । अर्थात प्रकृति के नियमानुसार ‘शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध और शक्ति’ इनका सहअस्तित्व होता है । ‘श्रीसत्शक्ति’ कहने पर उन शब्दों में स्थित चैतन्य तत्काल हमारे शरीर में प्रवेश करता है ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी (प.पू. बाबा) द्वारा लिखित तथा ढूंढकर भी किसी को न मिलनेवाला ग्रंथ प.पू. बाबा द्वारा आश्रम से ढूंढकर लाया जाना
यज्ञ आध्यात्मिक बल प्राप्त करने का सुलभ माध्यम है । उसके कारण ही प्राचीन काल से ‘यज्ञ करना’ वांछित फलप्राप्ति एवं आपत्ति निवारण का सुलभ मार्ग है । अत: यज्ञ का बडा महत्त्व है ।
१४ विद्याओं और ६४ कलाओं का उद्गम स्थान है भारत ! आकाश में अनंत तारे हैं । रात्रि के समय यदि हम स्वच्छ आकाश को देखें, तो अनेक नक्षत्र और तारे दिखाई देंगे । ये तारे और नक्षत्र संपूर्ण ब्रह्मांड को प्रकाशमान करते हैं ।
आध्यात्मिक उपचार के रूप में नामजप करनेवाले साधक आरंभ में प्राणशक्ति प्रणाली के अनुसार ढूंढा हुआ नामजप कर उसके उपरांत रामनाम का नामजप करें
मातंगी ‘वैखरी’ शब्द (वाणी) की अधिष्ठात्री देवी हैं, इसलिए उन्हें ‘वाक् विलासिनी’ (अपने लेखन अथवा वाणी से दूसरों का ध्यान आकर्षित करने की शक्ति) माना जाता है । देवी के स्वरूप को देखें, तो देवी के हाथ में हमें तोता दिखाई देता है । तोता वाणी का प्रतीक है ।