हिन्दू त्योहारों के विषय में प्रशासन और न्यायव्यवस्था द्वारा किया गया पक्षपात !

मार्च-अप्रैल २०२१ में कोरोना की दूसरी लहर आ रही थी तब बंगाल, तमिलनाडु, केरल ऐसे कुछ राज्यों में चुनाव हुए । इस निमित्त सभी दलों ने लाखों लोगों को रास्ते पर एकत्रित किया और शोभायात्राएं निकाली । जिसके परिणाम स्वरूप कोरोना संक्रमण में वृद्धि हुई ।

दिल्ली राजमार्ग पर धरना प्रदर्शन कर रहे किसानों को हटाने के संबंध में सरकार क्या कर रही है ? – उच्चतम न्यायालय का केंद्र सरकार से प्रश्न

उच्चतम न्यायालय ने पूछा है, कि कृषि कानूनों के विरोध में देश की राजधानी की सीमा पर राजमार्गों को बंद कर, गत कुछ माह से प्रदर्शन कर रहे किसानों को हटाने के लिए केंद्र सरकार क्या कर रही है । न्यायालय ने कहा, “राजमार्गों को स्थायी रूप से कोई अवरुद्ध नहीं कर सकता ।”

चिक्कमगलुरु दत्त पीठ में हिन्दू पुजारी की नियुक्ति करें ! – कर्नाटक उच्च न्यायालय का राज्य सरकार को आदेश

एक हिन्दू श्रद्धा स्थल के स्थान पर हिन्दू पुजारी नियुक्त करने के लिए न्यायालय को आदेश देना पडता है । इससे बहुसंख्यक हिन्दुओं के देश में हिन्दुओं की दुरावस्था ध्यान में आती है !

नवरात्रौत्सव में श्री दुर्गादेवी की मूर्ति की ऊंजाई ४ फीट तक सीमित रखने के शासन के आदेश में हस्तक्षेप करना, ओडिशा उच्च न्यायालय ने किया अस्वीकार !

बालू बाजार पूजा कमिटी के ओर से, श्री दुर्गादेवी की ८ फीट ऊंचाई तक की मूर्ति के लिए अनुमति देने की याचित्रा न्यायालय में प्रविष्ट की थी, उस पर न्यायालय ने यह निर्णय दिया ।

न्यायपालिका का भारतीयकरण होना चाहिए ! – मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमणा

अभी तक शासन करने वाले सर्वपक्षीय लोगों के लिए यह लज्जास्पद तथ्य है, कि स्वतंत्रता के ७४ वर्षों के उपरांत भी भारतीय न्यायपालिका का भारतीयकरण नहीं हुआ है !

जब गाय का कल्याण होगा, तभी जाकर देश का कल्याण होगा ! – इलाहाबाद उच्च न्यायालय

गाय की रक्षा करने का कार्य किसी एक धर्म अथवा पंथ का नहीं है, अपितु गाय भारतीय संस्कृति है । देश में रहनेवाले प्रत्येक नागरिक को, चाहे वह किसी भी धर्म का हो; उसे इस संस्कृति को बचाने का काम करना चाहिए ।

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत ! – मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली

यदि ऐसा है, तो ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड संपूर्ण देश के लिए कानून बनाने की मांग क्यों नहीं करते ?

कोरोना प्रतिबंधक टीके फेंकने के प्रकरण में इलाहाबाद उच्च न्यायालय का गंभीर दृष्टिकोण !

प्रतिभू (जमानत) आवेदन का विरोध करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि २ विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इस प्रकरण की जांच की है । इस जांच में पाया गया कि परिचारिका ने जानबूझकर कोरोना की बहुमूल्य २९ डोस फेंकी है ।

मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरूद्वारा के व्यवस्थापन के लिए एक समान कानून बनाए !

अन्य समय में ‘अल्पसंख्यकों को समान दर्जा दें’, ऐसी मांग करने वाले आधुनिकतावादी और धर्मनिरपेक्षतावादी ऐसा कानून बनाने की मांग क्यों नहीं करते ?

कोरोना के कारण मृत हुए लोगों के मृत्यु प्रमाणपत्र पर उल्लेख होगा !

भारत सरकार ने उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत किया प्रतिज्ञापत्र