भारत सरकार ने उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत किया प्रतिज्ञापत्र
नई दिल्ली – संपूर्ण देश में कोरोना के कारण मृत्यु होने वाले लोगों के मृत्यु प्रमाणपत्र पर उल्लेख किया जाएगा । भारत सरकार ने इस संबंध में उच्चतम न्यायालय में यह जानकारी दी है । उच्चतम न्यायालय के इस मामले में कठोर होने के बाद १० दिनों में सरकार ने यह मार्गदर्शक सूत्र जारी किए है ।
सरकार ने कहा कि, स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय वैद्यकीय शोध परिषद (आइ.सी.एम.आर.) ने नए मार्गदर्शक तत्व तैयार किए हैं । इसके अंतर्गत कोरोना से संबंधित मृत्यु के लिए अधिकृत कागजपत्र दिए जाएंगे ।
मार्गदर्शक सूत्र
१. जिन मरीजों की आर.टी.पी.सी.आर. जांच, रैपिड एंटीजन जांच या डॉक्टरों द्वारा अस्पताल में या घर पर की जांच के बाद मरीज का कोरोना पीडित होना पता चला है, ऐसे ही लोगों की बाद में मृत्यु होने पर उनके मृत्यु प्रमाणपत्र पर इसका उल्लेख किया जाने वाला है । विषबाधा, आत्महत्या, हत्या या दुर्घटना से या अन्य कारणों से मृत्यु होने पर यह कोरोना से संबंधित मृत्यु नहीं मानी जाएगी । वह व्यक्ति कोरोना पीडि़त होने पर भी यह मान्य नहीं किया जाएगा ।
२. जांच के बाद ३० दिनों के अंदर होने वाली मृत्यु कोरोना संबंधित मानी जाएगी । आइ.सी.एम.आर. के अध्ययन के अनुसार, ९५ प्रतिशत मृत्यु किसी व्यक्ति को कोरोना होने के २५ दिनों के अंदर होती है; परंतु अब नियमों में बदलाव कर कोरोना की जांच के ३० दिनों के अंदर होने वाली मृत्यु कोरोना संबंधित होने की मानी जाएगी । मरीज की मृत्यु घर पर या अस्पताल में होने पर भी यही नियम लागू होगा ।

Varanasi Masjid Demolished : काशी में न्यायालय के आदेश से रेलविभाग की भूमि पर स्थित मस्जिद को ढहाया !
मद्रास उच्च न्यायालय ने विद्यालय की भूमि पर चर्च के अनाधिकृत निर्माण पर रोक लगाई।
भारत में कानून की धार में तीक्ष्णता नहीं रही ; जब तक हाथ-पैर तोडे नहीं जाएंगे तब तक लोग कानून का पालन नहीं करेंगे !– Karnataka High Court
मृतक के नाम पर अभियोग चलाकर मंदिर प्रशासन के विरुद्ध अचलपुर के तहसीलदार के द्वारा दिया गया आदेश न्यायालय ने किया निरस्त ।
मंत्री-विधायक यह न समझे कि ईश्वर उनकी प्रतीक्षा में बैठे हैं । – Madras High Court
MLA T Raja Singh : मुसलमानों के दबाव के सामने झुककर पुलिस ने विधायक टी. राजासिंह की धर्मसभा को अनुमति नहीं दी ।