जम्मू की सीमा से सटे हुए गांव में पाक द्वारा ड्रोन से भेजा गया शस्त्र संग्रह नियंत्रण में !

पुलिस की राइफल लेकर भागनेवाले जिहादी आतंकवादी की मृत्यु !

‘नूपुर शर्मा को ईशनिंदा का दंड देकर ‘सुरक्षा जिहाद’ करें !’

जिहादी आतंकवादी संगठन, साथ ही उनके समर्थक मुसलमानों के विरुद्ध अब कडी कार्यवाही करने के लिए केंद्रशासन को सिद्ध होना आवश्यक !

तिरंगा यात्रा में सम्मिलित होने के कारण कश्मीर में हिन्दू बंधुओं पर आक्रमण !

कश्मीर में धारा ३७० निरस्त कर दी गई है, साथ ही प्रतिदिन आतंकवादियों की हत्या हो रही है । किंतु यहां का हिन्दुद्वेषी जिहादी आतंकवाद समाप्त नहीं होता । वह समाप्त करने के लिए पाक तथा कश्मीर की जिहादी मानसिकता को समाप्त करना आवश्यक है !

स्वतंत्रता दिवस पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी आक्रमण में एक व्यक्ति तथा एक पुलिसकर्मी घायल

आतंकवाद के निर्माता पाकिस्तान को जब तक भारत नष्ट नहीं करता, तब तक आतंकवाद को समूल नष्ट करना असंभव है, सरकारी तंत्रों को यह ध्यान में लेना चाहिए !

कश्मीर में कश्मीरी हिन्दुओं पर आक्रमण : एक मारा गया, दूसरा घायल

कश्मीर में सुरक्षाबलों की ओर से प्रतिदिन जिहादी आतंकवादियों को मारे जाने पर भी वहां का आतंकवाद समाप्त नहीं हुआ और जब तक उसके निर्माता पाक को नष्ट नहीं किया जाता, साथ ही जिहादी मानसिकता नष्ट नहीं की जाती, तब तक यह आतंकवाद नष्ट नहीं होगा, यह ध्यान में लें !

भारत को ‘इस्लामी राष्ट्र’ निर्माण करने का उद्देश्य ! – जैश-ए-मोहम्मद का आतंकवादी हबीबुल

हिन्दुओं, भारत पुन: इस्लामी राजसत्ता के नियंत्रण में जाने से पूर्व हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करें !

पी.एफ.आई. के ३ लाख बैंक खातों में इस्लामी देशों से प्रतिवर्ष जमा किए जाते हैं ५०० करोड रुपए !

एक इस्लामी संगठन को यदि इतने पैसे मिलते होंगे, तो अन्य इस्लामी संगठन, मदरसों और मस्जिदों को कितने पैसे मिलते होंगे, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती !

आतंकवादियों से लडाई !

वर्ष २०११ के ९ सितंबर ‘९/११’ को जिस ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ के ‘ट्वीन टॉवर’ पर हुए आतंकवादी आक्रमण में ३ सहस्र से अधिक अमेरिकी नागरिक मारे गए थे, उसका प्रतिशोध अमेरिका ने अंततः १ अगस्त २०२२ को ले ही लिया ।

असम में जिहादी गतिविधियां चलानेवाले ७०० मदरसे बंद !

संपूर्ण देश के अनेक मदरसे जिहादियों को आश्रय देनेवाले अड्डे बन चुके हैं, यह अनेक बार प्रमाणित हुआ है । इसलिए अब ऐसे कानून को केवल असम तक सीमित न रखकर केंद्र शासन को उसे राष्ट्रीय स्तर पर बनाने की आवश्यकता है !