भारतीय नौसेना ने साहसी कार्रवाई कर आरोपीयों को पकडा !

मुंबई – समुद्री सुरक्षा से जुडे एक प्रकरण में मुंबई की विशेष न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है । नौका को हडपने, चालक दल को बंधक बनाने तथा भारतीय नौसेना पर आक्रमण करने जैसे गंभीर आरोपों के अंतर्गत सोमालिया के ४४ नागरिकों को आजीवन कारावास का दंड दिया गया है । सुनवाई के समय सभी ४४ आरोपियों ने अपने अपराध स्वीकार किए । न्यायालय ने निर्णय सुनाते हुए भारतीय नौसेना की साहसी कार्रवाई एवं अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा में उसके योगदान की विशेष सराहना की ।
१. मार्च २०२४ में अदन की खाडी में सोमालिया के ९ नागरिकों ने एक ईरानी मत्स्य पालन नाव का अपहरण किया था । एके ४७ राइफलों एवं हाथ गोलों ( हैंड ग्रेनेड) से सज्ज इन सोमाली लोगों ने नाव के कर्मचारियों को ३ दिन तक बंधक बनाकर रखा । जब भारतीय नौसेना के युद्धपोत ‘आई.एन.एस. त्रिशूल’ एवं ‘आई.एन.एस. सुमेधा’ घटनास्थल पर पहुंचे, तब आरोपियों ने गोलीबारी की । उसके उपरांत नौसेना ने साहसी कार्रवाई कर सभी को बंदी बनाया लिया ।
२. दिसंबर २०२३ में माल्टा के व्यापारिक जहाज ‘एम.वी. रुएन्’ का अपहरण किया गया था । आई.एन.एस. कोलकाता ने कार्रवाई कर ३५ सोमाली नागरिकों को पकडा था । इन सभी पर परिवाद चलाया गया ।
आरोपियों के अक्षम्य कृत्यों के कारण न्यायालय ने दया न दिखाने का निर्णय लिया
४४ आरोपियों ने न्यायालय के समक्ष गरीबी एवं पारिवारिक दायित्वों का कारण देते हुए दंड में छूट की मांग की; परंतु न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, शस्त्रों की नोक पर जहाजों पर अपना आधिपत्य प्रस्थापित करना, चालक दल को बंधक बनाना एवं उन्हें फिरौती व अन्य आपराधिक कामों के लिए उपयोग करना अत्यंत गंभीर अपराध है । ऐसे कृत्यों पर दया नहीं दिखाई जा सकती । समुद्री डाकुओं ने भी न्यायालय के इस निर्णय का स्वागत किया है ।
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