जिला नहीं, अपितु राज्यस्तर पर अल्पसंख्यकों का दर्जा निश्चित हो ! – सर्वाेच्च न्यायालय
अब देश के ९ राज्याें में हिन्दुओं को अल्पसंख्यक घोषित करना चाहिए, ऐसा हिन्दुओं को लगता है !
अब देश के ९ राज्याें में हिन्दुओं को अल्पसंख्यक घोषित करना चाहिए, ऐसा हिन्दुओं को लगता है !
भारत में हिन्दू कैदियों को साधना सिखा कर उनसे धर्माचरण करवाना आवश्यक है ! ऐसा करने से उनकी अपराधी मानसिकता में परिवर्तन होकर उनमें सुधार हो सकता है !
भारत से पृथक (अलग) हुए मुसलमानबहुल देश में हिन्दू तथा सिक्खों की संख्या प्रतिदिन घट रही है । इस संदर्भ में पिछले ७५ वर्षों में भारत सरकार ने एक बार भी आवाज नहीं उठाई, न ही हिन्दू संगठनों ने इसके लिए सरकार पर दबाव डाला । भारत के हिन्दुओं के लिए यह लज्जास्पद है !
पीडित लडकी को तुरंत नहीं छुडाया गया गया, तो उसका बलपूर्वक धर्मांतरण कर अपहारणकर्ता से उसका विवाह कर दिया जाएगा, ऐसी संभावना ‘व्हॉईस ऑफ पाकिस्तान मायनोरीटी ‘ने ट्विट कर व्यक्त की।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने कहा कि ७५ प्रतिशत जनसंख्या का संदर्भ देते हुए मुसलमान समाज के लोग बहुत दिनों से विद्यालय के नियमों में परिवर्तन लाने के लिए दबाव डाल रहे थे ।
‘भारत में हिन्दू धर्म का पालन, अध्ययन और प्रचार की स्वतंत्रता का अभाव’ विषय पर बोलते हुए केंद्रीय अन्वेषण विभाग के (सीबीआई) के पूर्व महानिदेशक श्री. एम्. नागेश्वर राव ने कहा, ‘‘संविधान के अनुसार मिलनेवाले ५ अधिकारों में से हिन्दुओं को केवल राजनीतिक अधिकार ही मिले हैं
नरसिंहपुर (मध्य प्रदेश) – यहां के मुसलमान बहुल ‘महाजनी टोला’ में हिन्दुओं के घरों पर जिहादियों द्वारा पथराव करने के प्रकरण सामने आ रहे हैं । हिन्दुओं का कहना है कि “इस भाग में हिन्दुओं की संख्या अल्प है, इसी कारण जिहादी मुसलमान हमें कष्ट दे रहे हैं, जिससे हम यहां से पलायन करने को … Read more
इस्लामी अथवा ईसाई देशों की भांति हिन्दू राष्ट्र कोई संकीर्ण अवधारणा (संकल्पना) नहीं है, अपितु वह विश्वकल्याण का विचार करनेवाली, प्रत्येक नागरिक की लौकिक एवं पारलौकिक उन्नति का विचार करनेवाली एक सत्त्वप्रधान व्यवस्था है ।
संसार के अन्य किसी भी देश में बहुसंख्यकों के अधिकारों को ठुकराया नहीं जाता; परंतु भारत की ‘सेक्युलर’ राज्यप्रणाली के कारण हिन्दूबहुल भारत में हिन्दुओं की उपेक्षा हो रही है । वह न हो इसलिए भारत में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना होना आवश्यक है ।
जिन जिलों में ‘हिन्दू बहुसंख्यक’ नहीं हैं, न्यूनतम उन जिलों में तो हिन्दुओं को ‘अल्पसंख्यक’ घोषित किया जाए । असम में ऐसे अनेक जिले हैं, जहां हिन्दू अल्पसंख्यक हैं । उनमें भी कुछ जिलों में हिन्दुओं की संख्या ५ सहस्र से भी अल्प है और वहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं ।