
गुवाहाटी (असम) – राज्य में यदि हिन्दू बहुसंख्यक नहीं होंगे, तो उन्हें ‘अल्पसंख्यक’ घोषित किया जा सकता है । मैं यह आवाहन करता हूं कि जिन जिलों में ‘हिन्दू बहुसंख्यक’ नहीं हैं, न्यूनतम उन जिलों में तो हिन्दुओं को ‘अल्पसंख्यक’ घोषित किया जाए । असम में ऐसे अनेक जिले हैं, जहां हिन्दू अल्पसंख्यक हैं । उनमें भी कुछ जिलों में हिन्दुओं की संख्या ५ सहस्र से भी अल्प है और वहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं । यह मेरा व्यक्तिगत मत नहीं है; अपितु आंकडे ही वैसे हैं । असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने यह जानकारी दी ।
मुख्यमंत्री सरमा ने इस समय राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण की (‘एन.आर.सी.’ की) समीक्षा करने की भी मांग की । उन्होंने कहा कि ‘ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन’ (आसू) से हमारी बातचीत चल रही है । हमें ऐसा लगता है कि राज्य में पुनः एक बार राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण किया जाए । अगस्त २०१९ में राज्य में राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण किया गया था । उसमें ३ करोड ३० लाख लोगों ने आवेदन किए, उनमें से १९ लाख ६ सहस्र लोगों को बाहर निकाला गया था । (३१.४.२०२२)
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