अधिक मास के निमित्त निरंतर धर्मप्रसार का कार्य करनेवाले सनातन के आश्रमों को अन्नदान देकरपुण्यसंचय के साथ ही आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त करें !
सर्वत्र के अर्पणदाताओं को अन्नदान करने का सुअवसर !
सर्वत्र के अर्पणदाताओं को अन्नदान करने का सुअवसर !
जब हिन्दू भाई ‘लव जिहाद’ के संकट के विषय में बताते हैं, तब मुसलमान और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के लोग तर्क देते हैं कि ‘विवाह करनेवाली हिन्दू युवती और मुसलमान युवक को किससे विवाह करना है, यह उनका संवैधानिक अधिकार है’;
शास्त्रकारों ने बताया है कि ‘अधिक मास में मंगलकार्य न कर विशेष व्रत और पुण्यदायी कृत्य करने चाहिए ।’ इस मास में दान देने से उसका अनेक गुना फल मिलता है । इसलिए इस काल में वस्त्रदान, अन्नदान एवं ज्ञानदान करने का विशेष महत्त्व है । भारतीय संस्कृति में ‘ज्ञानदान देना’, सर्वश्रेष्ठ माना गया है; इसलिए अनेक लोग इसके लिए प्रयासरत रहते हैं ।
जब तक आप श्रीराम का अवतारी कार्य एवं श्रीराम की मूर्ति को दृढता के साथ हृदय में रखेंगे, तब तक हिन्दुओ, आपकी अवनति सहज नष्ट होने की आशा है ।
‘देह भले ही भिन्न हो, तब भी सभी में विद्यमान ‘ब्रह्म’ एक ही है’, यह कहकर भैंसे के मुख से भी वेद बुलवानेवाले संत ज्ञानेश्वरजी कहते हैं, ‘‘आत्मा एक ही है । हमारी भिन्न-भिन्न देह के रूप भले ही उसमें समाहित हों, तब भी हममें विद्यमान ईश्वर का आत्मरूप एक ही है ।’’
बांग्लादेश में हिन्दू समुदाय की रक्षा और भारत की अपनी सुरक्षा के लिए भारत सरकार से तत्काल एवं निर्णायक कार्रवाई करने का हिन्दू जनजागृति समिति आवाहन करती है । इसके लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया गया है ।
‘सनातन पंचांग एप’ के माध्यम से शुभ मुहूर्त, पर्व-त्योहार, स्वास्थ्य संबंधी सुझाव, सुविचार आदि दैनिक जीवन के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान की जाती है । यह एप सरल, सटीक और सात्त्विक है तथा परंपरा और तकनीक का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है ।
विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्यों से विनम्र अनुरोध !
‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ – एक भव्य राष्ट्रीय आयोजन, जहां भारत की संस्कृति, परंपरा, आध्यात्मिकता, शौर्य और स्वराज्य की प्रेरणा एक साथ अनुभव करें ।
भैयादूज के निमित्त बहन को उपहार के रूप में चिरंतन ज्ञानामृत से युक्त सनातन संस्था के ग्रंथ भेंट कर, साथ ही राष्ट्र-धर्म के प्रति गौरव बढानेवाले ‘सनातन प्रभात’ का सदस्य बनाकर अनोखा उपहार दीजिए !