‘आधुनिक जीवनशैली के कारण उत्पन्न होनेवाली शारीरिक समस्याओं के लिए ‘व्यायाम’ एक प्रभावी उपाय है । प्राचीन ग्रंथों में दिए व्यायाम के सिद्धांत आज भी उतने ही उपयुक्त हैं, जिनसे हम प्रेरणा ले सकते हैं । इस लेखमाला से हम व्यायाम का महत्त्व, व्यायाम से संबंधित शंकाओं का समाधान, ‘एर्गोनॉमिक्स’ का (Ergonomics) सिद्धांत तथा बीमारी के अनुसार उचित व्यायाम की जानकारी देंगे । व्यायाम के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने का यह प्रयास प्रेरणादायक सिद्ध होगा । इस लेख में हम ‘काम के कारण होनेवाली थकान में (बर्न-आउट में) क्या व्यायाम आवश्यक है ?’, इस विषय में समझ लेंगे ।

१. लंबे समय तक तनाव में काम करने के कारण (बर्न-आऊट) होनेवाली शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक थकान विश्राम कर भी अल्प न होना
‘चाहे हम काम कर रहे हों अथवा सेवा, प्रत्येक व्यक्ति ने इसका अनुभव किया होगा कि कभी निरंतर बैठकें, तो कभी आपातकालीन समयसीमाएं, कभी प्रचुर मात्रा में संगणकीय पत्र (ई-मेल्स), तो कभी कठिन लक्ष्य साध्य करने हेतु प्रयास (टारगेट्स) होते हैं ! ऐसी स्थिति में आनेवाले तनाव की अनदेखी कर हम लंबी अवधि तक काम करते रहते हैं ।
तनाव की अनदेखी कर लंबी अवधि तक काम करते रहने से हम बहुत थक जाते हैं तथा और कुछ करने की इच्छा ही नहीं रहती । विशेष बात यह कि विश्राम लेकर भी इसमें सुधार नहीं होता । इससे होनेवाली शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक थकान, जो विश्राम कर भी तुरंत अल्प नहीं होती; इसे ‘बर्न-आउट’ कहा जाता है ।

२. ‘बर्न-आउट’ के लक्षण
‘ऊर्जा क्षीण होना, काम में रूचि न रहना तथा कार्यक्षमता घट जाना’ ‘बर्नआऊट’ के मुख्य लक्षण होते हैं । ऐसी स्थिति में हमने विश्राम किया, तब भी थकान, उदासीनता तथा हतोत्साही रहना वैसे ही टिका रहता है ।
३. ‘बर्न-आउट’ के कारण
बर्न-आउट केवल काम करने से ही नहीं आता, अपितु ‘अति शारीरिक परिश्रम करना तथा मन पर समयसीमा का निरंतर बना रहनेवाला तनाव संग्रहित होते जाना’, इसके कारण आता है । शरीर एवं मन एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं । इसमें एक भी थक जाता है, तो दूसरा भी थक जाता है तथा इसका कुल परिणाम ‘बर्न-आउट’ के रूप में प्रकट होता है ।
४. ‘बर्न-आउट’ के विषय में किया शोध क्या बताता है ?
अ. वर्ष २०२० में ‘बी.एम.सी. पब्लिक हेल्थ’ (BMC Public Health) नामक ‘जर्नल’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार ‘जो लोग प्रतिदिन ६ घंटे से अधिक बैठे रहते हैं, उनमें मानसिक एवं भावनात्मक थकान (Burnout) का स्तर अधिक दिखाई देता है । अल्प शारीरिक हलचल के कारण शरीर में तनाव संप्रेरक का (‘कॉर्टिसॉल’ का ) स्तर नियंत्रण में नहीं रहता । इसके कारण तनाव सहन करने की क्षमता क्षीण होती है ।’
आ. वर्ष २०२० में ‘ऑक्युपेशनल हेल्थ’ (Occupational Health) नामक ‘जर्नल’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार ‘थोडी शारीरिक हलचल करनेवाले कर्मचारियों में काम के कारण होनेवाली थकान २५ प्रतिशत अल्प हुई ।’
इ. वर्ष २०१८ में ‘ऑक्युपेशनल मेडिसिन’ (Occupational Medicine) ‘जर्नल’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार ‘जो लोग सप्ताह में न्यूनतम ३ बार मध्यम अथवा तीव्र व्यायाम करते हैं, उनमें ‘बर्न-आउट’ के लक्षण लक्षणीय रूप से अल्प होते हैं । व्यायाम के कारण डोपामाइन, सेरोटोनिन एवं एंडॉर्फिन, इन रसायनों की निर्मिति बढती है, जो व्यक्ति की विशिष्ट स्थिति में मानसिक अथवा भावनात्मक अवस्था (मूड) में सुधार लाने तथा मानसिक तनाव अल्प करने में सहायता करता है ।’
५. ‘बर्न-आउट’ का संकट किसे ?
घंटों तक बैठे रहना तथा मानसिक तनाव लेना, ये दोनों बातें ‘बर्न-आउट’ के लिए अत्यंत पोषक सिद्ध होती हैं । दुर्भाग्यवश अधिकांश लोग इस पर एक ही उपाय करते हैं तथा वह है चाय अथवा कॉफी का सेवन कर लंबे समय तक काम करते रहना ! ऐसे ‘बर्न-आउट’ का सबसे अधिक खतरा निम्नांकित लोगों को है –
अ. पूरा दिन संगणक के सामने अथवा एक ही स्थिति में बैठे रहनेवाले अथवा नौकरी करनेवाले
आ. अनेक भूमिका निभानेवाले उद्योगपति
इ. घर एवं काम संभालनेवाले अभिभावक
ई. निरंतर भागदौड करनेवाले व्यस्त लोग’
(क्रमशः)
– श्री. निमिष म्हात्रे, भौतिकोपचार विशेषज्ञ, फोंडा, गोवा (२५.६.२०२५)
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