
१. बहन के संकल्प की अद्भुत शक्ति से युक्त राखी का धागा !
‘रक्षाबंधन के दिन भाई की रक्षा का संकल्प साकार करने हेतु बहन भाई के घर आती है । राखी का धागा छोटासा होता है; परंतु बहन का संकल्प उसमें अद्भुत शक्ति भर देता है । ये संकल्प जितने निःस्वार्थ, निर्दाेष एवं पवित्र होते हैं, उतना ही उनका प्रभाव बढता है ।
बहन भाई को राखी बांधती है; क्योंकि ‘मेरा भाई वर्षभर सभी संकटों एवं बाधाओं पर विजय प्राप्त करे’, यह उसकी कामना होती है । बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर यह संकल्प लेती है, ‘मेरा भाई त्रिलोचन बने । वह माया के दलदल में न फंसे । भोग से रोग होते हैं तथा उससे भय उत्पन्न होता है । मेरा भाई भोगी नहीं, अपितु योगी बने । मेरे भाई की दृष्टि मंगलमय हो तथा उसका मंगल हो ।’
भाई भी इस दिन बहन को कुछ ऐहिक वस्तुएं भेंट कर उसे संतुष्ट करता है । उसके साथ ही बहन के जीवन का दायित्व तथा बहन के जीवन में आनेवाली समस्याएं दूर करने का दायित्व भी अपने चित्त पर अंकित करता है ।
२. भारतीय नर-नारियो, अपनी दृष्टि विशाल बनाएं !
भाई-बहनों से यह अपेक्षा है कि आप केवल अपने घर तक ही सीमित न रहें । ‘दीदी, तुम भारत की नारी हो ।’ बहन को लगता है, ‘भैया, तुम भारत के नर हो ।’
नारियों ने यदि अपने हृदय में भारतीय संस्कृति संजोई तथा उसे दृढ बनाया, तो पशुतुल्य आचरण करनेवाले (मन की पाशवी वृत्तियों के अधीन) पति को पशुपति बनाने में वह सफल हो सकती हैं ।
भाई भी संकीर्ण न हों । अपनी केवल एक-दो बहनें ही नहीं हैं, अपितु ‘पडोस की बहन भी हमारी ही बहन है’, ऐसा मानना चाहिए । ‘भाई से पडोस की बहन की भी रक्षा हो तथा बहन से भी पडोस के भाई का भी मंगल हो’, यह सद्भावना रखनी चाहिए । परस्पर हित का भाव समाज में फैलना चाहिए ।
(साभार : मासिक ‘ऋषि प्रसाद’, जुलाई २०२२)
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