आंखों में संक्रमण का अर्थ एवं उसका उपचार
‘आंखों में संक्रमण होने का निश्चित अर्थ क्या है? यह किस कारण से होता है ? उसके लक्षण क्या हैं ? इसके लिए क्या उपचार करें ? इन सभी प्रश्नों के उत्तर आज हम जानेंगे एवं इससे संबंधित सावधानी रखेंगे ।
‘आंखों में संक्रमण होने का निश्चित अर्थ क्या है? यह किस कारण से होता है ? उसके लक्षण क्या हैं ? इसके लिए क्या उपचार करें ? इन सभी प्रश्नों के उत्तर आज हम जानेंगे एवं इससे संबंधित सावधानी रखेंगे ।
भारत एक हिन्दू बहुसंख्यक देश है एवं वह मुसलमान बहुसंख्यक देश अफगानिस्तान की सहायता कर रहा है; परंतु इस देश में कितने हिन्दू शेष हैं ?
यहां सबसे महत्त्वपूर्ण सूत्र है, रुग्ण अपने आहार-विहार में कोई परिवर्तन नहीं करता । इस कारण अम्ल पित्त का कष्ट बार-बार होता रहता है । आरंभ में पित्त बढानेवाला आहार लेने से ही अम्ल पित्त का कष्ट होता है । कुछ समय पश्चात कुछ भी खाने से अम्ल पित्त निर्मित होने लगता |
नाभि शरीर का केंद्र बिंदु होने से वहां अन्य अवयवों को जोडकर रखनेवाले बिंदुदाब के अनेक बिंदु (एक्यूप्रेशर पॉईंट्स) होते हैं । इसलिए नाभि में कुछ बूंद घी डालकर मसाज (मालिश) करने से जोडों का दर्द भी दूर हो सकता है ।
प्रदूषण के कारण देहली के नागरिकों की जीवन प्रत्याशा ११ वर्ष ९ माह घट रही है !
भाग्यनगर में (हैद्राबाद) एक शास्त्रज्ञ ने खोज की, केले के पेड के तने अथवा केले के पेड मे लगे केलोंके गुच्छे के सिरे पर कमल के आकार का सिरा, पत्तों में जो चिपचिपा द्रव्य पदार्थ होता है, उसे खाने के उपरांत कर्करोग (कैंसर) बढानेवाली ग्रंथी धीरे-धीरे निष्क्रीय होती जाती है । इसलिए पुराने काल के … Read more
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद का अनुसंधान
राष्ट्रीय वैद्यकीय आयोग के नए नियम !
एकाएक रोगग्रस्त (बीमार) हुए अथवा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति पर डॉक्टर, वैद्य अथवा रुग्णयान (एंबुलेंस) उपलब्ध होने तक किए जानेवाले तात्कालिक अथवा प्राथमिक स्वरूप के उपचारों को ‘प्राथमिक उपचार’ कहते हैं । प्राथमिक उपचार में चिकित्सकीय उपचार (‘मेडिकल ट्रीटमेन्ट’) सम्मिलित नहीं है ।
विज्ञान ने की प्रगति का लाभ लेते हुए उसकी अति करने का क्या परिणाम होता है, यह भी इस घटना से ध्यान में आता है ! इसलिए इस प्रकार की बातों का उपयोग कौन करे कौन नहीं, ऐसा नियम होना भी आवश्यक है !