बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ होगा!

  • मध्य प्रदेश स्थित इस विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने प्रस्ताव को दी स्वीकृति

  • सरकार एवं राज्यपाल के पास विधेयक बनाने के लिए जाएगा विश्वविद्यालय का प्रस्ताव

भोपाल (मध्य प्रदेश) – यहाँ के ‘बरकतउल्ला विश्वविद्यालय’ का नाम बदलने की माँग कई वर्षों से हिंदू संगठनों द्वारा की जा रही है। अब इस विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। यह प्रस्ताव अब राज्य के उच्च शिक्षा विभाग एवं उसके बाद सरकार के पास भेजा जाएगा। विधानमंडल में इस नामकरण पर विधेयक प्रस्तुत कर उसे पारित होने के बाद राज्यपाल द्वारा नाम परिवर्तन को अंतिम रूप दिया जाएगा।

परिषद की बैठक में यह तर्क दिया गया कि राजा भोज का नाम राज्य की ऐतिहासिक तथा बौद्धिक विरासत का प्रतीक है। विश्वविद्यालय कार्यकारी परिषद की सदस्य डॉ. ताहिरा अब्बासी ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का वर्तमान नाम स्वतंत्रता सेनानी बरकतउल्ला भोपाली की स्मृति से जुड़ा हुआ है। इसे बदलना उचित नहीं होगा। (मुसलमान कहीं भी या किसी भी पद पर जाएँ, वे पहले मुसलमान होते हैं, ऐसा जो कहा जाता है, यह उसी का उदाहरण है! – संपादक)

कांग्रेस के मुसलमान-प्रेम का अंत! – भाजपा

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा शिवपुरी ने इस नामकरण पर तंज कसते हुए कहा कि वर्ष १९८८ में कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह द्वारा किए गए तुष्टीकरण का इस नामकरण के माध्यम से अंत हो जाएगा।

हिंदू संगठनों ने व्यक्त की प्रसन्नता!

इस मामले में ‘श्री हिंदू उत्सव समिति’ एवं ‘संस्कृति बचाओ मंच’ ने प्रसन्नता व्यक्त की है। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा, ‘‘यह मांग लंबे समय से की जा रही थी। वह अब पूरी होती हुई दिखाई दे रही है। राज्य में कई स्थानों के नाम ऐसे हैं, जिन्हें बदलकर देशभक्तों एवं क्रांतिकारियों के नाम पर रखा जाना चाहिए।’’

विश्वविद्यालय के शैक्षणिक ढांचे में भी बदलाव!

केवल नाम ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक ढांचे में भी बदलाव निश्चित किए गए हैं। अरबी एवं फारसी (पर्शियन) जैसे पारंपरिक विषयों को एक साथ लाकर ‘तुलनात्मक भाषा तथा संस्कृति विभाग’ के रूप में पुनर्गठन किया जाएगा।

संपादकीय भूमिका

इस प्रकार एक-एक राज्य के एक-एक विश्वविद्यालय, गाँव एवं शहर का नाम बदलने में समय लगाने के स्थान पर, एक ही बार में यह घोषित कर दिया जाना चाहिए कि 'यह देश हिंदुओं का है। यहाँ हिंदू परंपराओं को ही प्राथमिकता दी जाएगी' एवं नाम बदलने का अभियान हाथ में लिया जाना चाहिए। निश्चित रूप से, ऐसा होने के लिए 'हिंदू राष्ट्र' की ही आवश्यकता है!