Islam Friendly Gym : केरल में ‘इस्लाम-फ्रेंडली’ व्यायामशाला को लेकर विवाद

इस्लामी नियमों का किया जाएगा पालन

कोच्चि (केरल) – केरल के पलक्कड जिले के पुथुनगरम में एक व्यायामशाला (जिम) को लेकर बडा विवाद उत्पन्न हो गया है । इस व्यायामशाला को ‘इस्लाम-फ्रेंडली’ बताया जा रहा है । इसकी ओर से घोषणा की गई है कि यह जिम इस्लाम के नियमों के अनुसार संचालित किया जाएगा । इसमें इस्लामी नियमों के अनुरूप प्रशिक्षण, स्त्री-पुरुषों के लिए पृथक व्यवस्था तथा निर्धारित वेशभूषा लागू की जाएगी । इस अवधारणा पर अनेक लोगों ने प्रश्न उठाए हैं । इस व्यायामशाला का एक विज्ञापन वीडियो भी प्रसारित किया गया है । इसमें इसके संचालक नवाज मुथू टी. ने कहा है कि इस जिम में ऊंची आवाज में संगीत नहीं बजाया जाएगा तथा पुरुषों एवं महिलाओं के लिए समय एवं स्थान अलग-अलग निर्धारित किए जाएंगे । बताया जा रहा है कि यह व्यायामशाला पिछले १५ वर्षों से संचालित हो रही है । अब इसमें धार्मिक आधार पर कुछ परिवर्तन किए जा रहे हैं ।

व्यायामशाला के नए नियम

१. परिसर में किसी प्रकार का संगीत या गीत नहीं बजाया जाएगा ।

२. पुरुष एवं महिलाएं एक साथ व्यायाम नहीं करेंगे ।

३. पुरुषों एवं महिलाओं के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया जाएगा ।

४. महिलाओं को इस्लामी वेशभूषा धारण करनी होगी । इसके अंतर्गत शरीर को पूर्णतः ढंकने वाले वस्त्र तथा हिजाब ( मुसलमान महिलाओं का सिर तथा गर्दन ढंकने का वस्त्र ) पहनना अपेक्षित होगा ।

५.  अन्य धर्मों के लोग भी इस व्यायामशाला में आ सकते हैं ; किन्तु उन्हें इन नियमों का पालन करना होगा ।

नियम केवल मुसलमानों के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए हैं – संचालक का स्पष्टीकरण

व्यायामशाला के संचालक नवाज ने कहा, “हम ऐसी व्यायामशाला प्रारंभ कर रहे हैं जो इस्लामी मूल्यों के अनुकूल होगी तथा मेरा मानना है कि केरल में इस प्रकार की यह पहली व्यायामशाला होगी । जिन लोगों की इसमें रुचि है, वे मुझसे संपर्क कर सकते हैं तथा स्वयं आकर इसे देख सकते हैं । बहुत से लोग यह कह रहे हैं कि यह मुसलमानों की व्यायामशाला है अथवा केवल मुसलमानों के लिए है । मैंने कभी ऐसा नहीं कहा कि यह जिम केवल मुसलमानों के लिए है । ‘इस्लाम-फ्रेंडली’ शब्द का अर्थ कुछ विशेष कार्य-पद्धतियों का पालन करना है, न कि किसी को प्रवेश से वंचित करना ।

अनेक लोग, जो इस्लामी नियमों का कठोरता से पालन करते हैं, सामान्यतः व्यायामशालाओं में जाना टाल देते हैं ; क्योंकि उन्हें सार्वजनिक वातावरण अथवा तेज संगीत के मध्य व्यायाम करना सुविधाजनक नहीं लगता । मेरे अपने परिवार तथा रिश्तेदारों में भी कई लोग इन्हीं कारणों से जिम जाने से बचते रहे हैं । यह सुविधा ऐसे लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी ।”

संपादकीय भूमिका

देश में तथाकथित ‘जिम जिहाद’ चल रहे होने की बात कही जा रही है । ऐसे में यदि कोई मुसलमानों के लिए पृथक व्यायामशाला स्थापित कर रहा है, तो उसे एक अच्छी पहल माना जा सकता है । यदि कोई यह मांग करता है कि ‘हिन्दुओं की व्यायामशालाओं में भी अब मुसलमानों का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए’, तो उसे अनुचित नहीं कहा जाना चाहिए ।