Ramdas Athawale : (और इनकी सुनिए…) ‘अवैध मद्यभट्टियों को अधिकृत करने पर सरकार को राजस्व प्राप्त होगा !’

  • केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले की विचित्र मांग !

  • गडचिरोली में मद्यनिषेध (शराबबंदी) हटाने की राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता की मांग !

भिवंडी – अवैध भट्टी की मद्य पीने से आज तक सहस्रों लोगों की मृत्यु हुई है । पुणे, पिंपरी-चिंचवड में १८ से १९ लोगों की मृत्यु हुई । श्रमिक वर्ग परिश्रम करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं । तनाव की स्थिति में वे अवैध भट्टी की मद्य पीते हैं । पुलिस ने कितनी भी छापामारी की, तथापि अवैध मद्यभट्टियां चलती ही रहती हैं । एक स्थान की मद्यभट्टी बंद होने पर भी दूसरी गली में बोतलें उपलब्ध हो जाती हैं । इसलिए वे कभी भी बंद नहीं होतीं । इससे अच्छा है कि अवैध मद्यभट्टियों को अधिकृत कर दिया जाए, इससे सरकार को राजस्व प्राप्त होगा, साथ ही निर्धन नागरिकों के प्राणों की रक्षा होगी, ऐसा वक्तव्य केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने सरकार को संबोधित करते हुए दिया । वे भिवंडी में एक कार्यक्रम के निमित्त आए हुए थे, तब वे पत्रकारों से वार्तालाप कर रहे थे ।

‘विषाक्त मद्य कब तक पिलाओगे ? गडचिरोली जिले का मद्यनिषेध हटाओ’, ऐसी मांग राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता धर्मराव बाबा आत्राम ने की है । मद्यनिषेध हटाने की मांग के लिए मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस से भेंट करने की बात भी उन्होंने कही । (यदि मद्यनिषेध हटाया गया, तो जिन क्षेत्रों में मद्यनिषेध लागू किया गया है, वहां की नीतियों अथवा सिद्धान्तों को तिलाञ्जलि देने जैसा होगा ! – संपादक) ‘महुआ की मद्य को वैधानिक (कानूनी) घोषित करो । आदिवासी संस्कृति में जन्म, विवाह, मृत्यु ऐसे अवसरों पर लोग महुआ की मद्य पीते हैं’, ऐसा भी उन्होंने कहा ।

संपादकीय भूमिका

  • जनता के स्वास्थ्य का विचार न करते हुए केवल राजस्व के लिए ऐसी मांग करना सर्वथा अयोग्य है ! इस प्रकार की मांगें अर्थात् ‘रोग से भी अधिक भयानक उपचार’ जैसी स्थिति है । इससे व्यसनाधीनता (नशाखोरी) बढकर नागरिकों का स्वास्थ्य बिगडने पर उसके लिए उत्तरदायी कौन ? यह विचार नेता क्यों नहीं करते ?
  • जनता के लिए हानिकारक सिद्ध होने वाले नहीं, अपितु जनता के लिए क्या आवश्यक है, उसकी पूर्ति करने वाले शासक चाहिए !