दीपावलीका आनंद द्विगुणित करनेवाले
त्योहार मनानेकी उचित पद्धतियां एवं अध्यात्मशास्त्र

- बलि प्रतिपदा (दीपावली पडवा) साढेतीन मुहूर्ताें में से एक मुहूर्त है !
- त्योहार धर्मशास्त्रानुसार ही क्यों मनाने चाहिए ?
- दिवाली (दीपावली) की व्युत्पत्ति एवं इतिहास
- दिवाली (दीपावली) त्योहार मनाने की पद्धति
देवीपूजनका अध्यात्मशास्त्र (लघुग्रन्थ)

- कुमकुमार्चनका शास्त्रोक्त आधार क्या है ?
- देवीकी आरती करनेकी उचित पद्धति क्या है ?
- देवीकी आंचलभराई क्यों और कैसे करें ?
- दीपावलीके दिन लक्ष्मीपूजनका क्या महत्त्व है ?
सात्त्विक रंगोलियां (लघुग्रन्थ)
केवल सुन्दर दिखनेवाली रंगोलियोंकी अपेक्षा देवताओंके तत्त्व आकृष्ट एवं प्रक्षेपित करनेवाली रंगोलियां लाभदायक होती हैं । देवताओंकी उपासना हेतु तथा त्योहार, जन्मदिन आदि प्रसंगोंमें बनाई जानेवाली रंगोलियां इस लघुग्रन्थमें प्रस्तुत हैं ।
संपर्क क्र. : (0832) 2312664
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सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?