पौष पूर्णिमा (१७ जनवरी)

गंगास्नान धर्माशास्त्रानुसार करें !
१. ‘गंगाजी शिवतत्त्व का सगुण रूप है’, इस मनोभाव से नमस्कार करें तथा विष्णुस्मरण करें ।
२. गंगास्नान हेतु नदी में उतरने पर प्रवाह अथवा सूर्य की दिशा में मुख कर नाभि तक पानी में तीन डुबकियां लगाएं । स्नान करते समय श्लोक पाठ अथवा देवता का जप करें । नाभि तक पानी में खडे रहकर गंगाजी को अर्घ्य दें । स्नान के उपरांत कदंब के पुष्प से गंगाजी का पूजन करें ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?