सर्वोच्च न्यायालय ने हवाई अड्डे के नामांतर के मांग की याचिका निरस्त की

सर्वोच्च न्यायालय ने नई मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को ‘दि.बा. पाटिल’ का नाम देने की मांग करनेवाली याचिका निरस्त की । ‘हवाई अड्डे का नामकरण सरकार का नीतिगत निर्णय है’, ऐसा न्यायालय ने कहा ।

नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरनाक कुत्तों को सुई लगा कर मारो ! – Supreme Court

भटकते कुत्तों की समस्या पर सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम आदेश

आदेश न मानने वाले अधिकारियों पर आपराधिक प्रकरण चलाने का भी दिया निर्देश

सनातन धर्म का फिर से अपमान करने वाले उदयनिधि स्टालिन के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका ।

द्रमुक नेता उदयनिधि ने सितंबर २०२३ में ‘सनातन धर्म’ की तुलना ‘मलेरिया’ तथा ‘डेंगू’ जैसे रोगों से करते हुए उसके विनाश की ओर इंगित किया था । उन्होंने कहा था कि ‘सनातन धर्म जातिव्यवस्था एवं ऐतिहासिक भेदभाव पर आधारित है ।’

सुधार के नाम पर धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघन नहीं किया जा सकता !

सामाजिक सुधारों के नाम पर धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं किया जा सकता । संविधान के निर्माताओं ने समाज की आवश्यकताओं के अनुसार जो प्रावधान निर्मित किए हैं, उन्हें ९ न्यायाधीशों की पीठ परिवर्तित नहीं कर सकती ।

Sabarimala PIL Supreme Court : क्या आप देश के मुख्य पुजारी हैं ?

सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के समय सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता ‘इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन’ को कडे शब्दों में फटकार लगाई ।

वाराणसी में ज्ञानवापी के समीप दीवार पर भगवा रंग में बनाए गए मधुबनी चित्र का मुसलमानों द्वारा विरोध

वाराणसी में शुक्रवार की नमाज से पहले ज्ञानवापी एवं काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार संख्या ४ के बाहर कुछ समय के लिए तनाव का वातावरण बन गया था ।

Sabarimala Case : सुधार के नाम पर (हिन्दू) धर्म को खोखला नहीं किया जा सकता ! — सर्वोच्च न्यायालय

केरल राज्य के शबरीमाला मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश से संबंधित याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई शुरू है ।

धार्मिक उपक्रमों के नाम पर मार्ग अवरुद्ध नहीं किए जा सकते ! – Supreme Court

सर्वोच्च न्यायालय में चल रहा शबरीमला मन्दिर की परम्पराओं का प्रकरण l
सरकार को कार्यवाही करने का अधिकार होने का न्यायालय का मत l

Supreme Court Namaz : (और इनकी सुनिए…) ‘महिलाओं को नमाज के लिए मस्जिदों में प्रवेशबंदी न होते हुए भी, उनका घर पर ही नमाजपठण करना अधिक अच्छा है !’

घर में नमाज पढ़ने पर महिलाओं को मस्जिद में नमाजपठने वाले पुरुषों जितना ही धार्मिक फल मिलता है, ऐसी जानकारी ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायालय में दी ।

हिन्दू समाज को संप्रदायों में विभाजित न होकर स्वयं एकजुट होना होगा l – Supreme Court

आप यह नहीं कह सकते कि “हम एक संप्रदाय के हैं और वे दूसरे के ।” यदि हिन्दू संप्रदाय दूसरों के लिए अपने द्वार नहीं खोलते, तो अंततः उनको ही हानि होगी। ऐसा अवलोकन सर्वोच्च न्यायालय ने सबरीमला मंदिर की घटना की सुनवाई के समय किया ।