सर्वोच्च न्यायालय में ५ नए न्यायाधीश, अब एक पद रिक्त !

आगामी १५ दिनों में २ न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने के कारण संख्या ३५ हो जाएगी !

उच्च न्यायालयों को तीन मास से अधिक समय तक निर्णय प्रलंबित नहीं रखना चाहिए ! – सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश

केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया था कि देशभर के न्यायलयों में कुल ५,४९,००,००० से अधिक प्रकरण लंबित हैं । इसमें देश के पच्चीस उच्च न्यायालयों में ६३,३३,४०६ प्रकरण लंबित हैं ।

Illegal Infiltration Committee : घुसपैठ जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा समिति की स्थापना l

सरकार का कथन है कि घुसपैठ के कारण देश के अनेक भागों में जनसंख्या की संरचना परिवर्तित हो रही है तथा यह सुरक्षा के लिए एक बडी चुनौती है ।

इस्लाम में ब्याज लेना ‘हराम’ होते हुए भी ३ सहस्र करोड हडपनेवाली नौहेरा शेख को बंदी बनाया गया ।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) एवं हरियाणा पुलिस ने एक संयुक्त अभियान चलाकर ‘हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज’ की संस्थापक नौहेरा शेख को यहां से कुछ ही दिन पूर्व बंदी बनाया ।

जब दोनों माता-पिता भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हों, तो उनके बच्चों को आरक्षण क्यों दिया जाए ? – Supreme Court

यदि माता-पिता दोनों भारतीय प्रशासनिक सेवा (आई.ए.एस. – इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस) के अधिकारी हों, तो उनके बच्चों को आरक्षण क्यों मिलना चाहिए ? ऐसा प्रश्न सर्वोच्च न्यायालय ने उपस्थित किया ।

Bhojshala Case : (और इनकी सुनिये ) ‘तथ्य सही प्रकार से प्रस्तुत नहीं किए गए ।’– मुसलमान पक्ष

भोजशाला के प्रकरण में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के विरोध में मुसलमान पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है ।

सर्वोच्च न्यायालय ने हवाई अड्डे के नामांतर के मांग की याचिका निरस्त की

सर्वोच्च न्यायालय ने नई मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को ‘दि.बा. पाटिल’ का नाम देने की मांग करनेवाली याचिका निरस्त की । ‘हवाई अड्डे का नामकरण सरकार का नीतिगत निर्णय है’, ऐसा न्यायालय ने कहा ।

नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरनाक कुत्तों को सुई लगा कर मारो ! – Supreme Court

भटकते कुत्तों की समस्या पर सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम आदेश

आदेश न मानने वाले अधिकारियों पर आपराधिक प्रकरण चलाने का भी दिया निर्देश

सनातन धर्म का फिर से अपमान करने वाले उदयनिधि स्टालिन के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका ।

द्रमुक नेता उदयनिधि ने सितंबर २०२३ में ‘सनातन धर्म’ की तुलना ‘मलेरिया’ तथा ‘डेंगू’ जैसे रोगों से करते हुए उसके विनाश की ओर इंगित किया था । उन्होंने कहा था कि ‘सनातन धर्म जातिव्यवस्था एवं ऐतिहासिक भेदभाव पर आधारित है ।’

सुधार के नाम पर धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघन नहीं किया जा सकता !

सामाजिक सुधारों के नाम पर धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं किया जा सकता । संविधान के निर्माताओं ने समाज की आवश्यकताओं के अनुसार जो प्रावधान निर्मित किए हैं, उन्हें ९ न्यायाधीशों की पीठ परिवर्तित नहीं कर सकती ।