Sabarimala PIL Supreme Court : क्या आप देश के मुख्य पुजारी हैं ?

सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के समय सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता ‘इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन’ को कडे शब्दों में फटकार लगाई ।

वाराणसी में ज्ञानवापी के समीप दीवार पर भगवा रंग में बनाए गए मधुबनी चित्र का मुसलमानों द्वारा विरोध

वाराणसी में शुक्रवार की नमाज से पहले ज्ञानवापी एवं काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार संख्या ४ के बाहर कुछ समय के लिए तनाव का वातावरण बन गया था ।

Sabarimala Case : सुधार के नाम पर (हिन्दू) धर्म को खोखला नहीं किया जा सकता ! — सर्वोच्च न्यायालय

केरल राज्य के शबरीमाला मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश से संबंधित याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई शुरू है ।

धार्मिक उपक्रमों के नाम पर मार्ग अवरुद्ध नहीं किए जा सकते ! – Supreme Court

सर्वोच्च न्यायालय में चल रहा शबरीमला मन्दिर की परम्पराओं का प्रकरण l
सरकार को कार्यवाही करने का अधिकार होने का न्यायालय का मत l

Supreme Court Namaz : (और इनकी सुनिए…) ‘महिलाओं को नमाज के लिए मस्जिदों में प्रवेशबंदी न होते हुए भी, उनका घर पर ही नमाजपठण करना अधिक अच्छा है !’

घर में नमाज पढ़ने पर महिलाओं को मस्जिद में नमाजपठने वाले पुरुषों जितना ही धार्मिक फल मिलता है, ऐसी जानकारी ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायालय में दी ।

हिन्दू समाज को संप्रदायों में विभाजित न होकर स्वयं एकजुट होना होगा l – Supreme Court

आप यह नहीं कह सकते कि “हम एक संप्रदाय के हैं और वे दूसरे के ।” यदि हिन्दू संप्रदाय दूसरों के लिए अपने द्वार नहीं खोलते, तो अंततः उनको ही हानि होगी। ऐसा अवलोकन सर्वोच्च न्यायालय ने सबरीमला मंदिर की घटना की सुनवाई के समय किया ।

यदि किसी श्रद्धालु को देवता की मूर्ति को स्पर्श करने से रोका जाता है, तो क्या ऐसी स्थिति में राज्यघटना सहारा देगी ? – सर्वोच्च न्यायालय का प्रश्न

यदि किसी श्रद्धालु को देवता की मूर्ति को स्पर्श करने से रोका जाता है, तो क्या उस स्थिति में राज्यघटना उसके समर्थन में आगे आएगी, ऐसा प्रश्न सर्वोच्च न्यायालय ने शबरीमाला मंदिर में १० से ५० वर्ष आय वर्ग की महिलाओं के प्रवेश से संबंधित प्रकरण की सुनवाई के समय उठाया ।

प्रशासनिक उदासीनता के कारण राजमार्ग घातक मार्ग न बनें ! – Supreme Court

जनता का मानना है कि प्रशासनिक उदासीनता के लिए उत्तरदायी लोगों को राजमार्ग पर ही मृत्यु दंड दिया जाए, तभी यह समस्या दूर होगी !

समान नागरिक संहिता का धर्म से कोई संबंध नहीं ! – Supreme Court

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यदि न्यायालय शरीयत कानून की इन धाराओं को निरस्त करता है, तो भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम लागू किया जा सकता है । व्यक्तिगत कानून को संविधान के अनुच्छेद २५ के अंतर्गत संरक्षण प्राप्त नहीं है ।

सामाजिक सुधार के नाम पर धर्म को खोखला नहीं किया जा सकता ! – Supreme Court

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा धार्मिक संस्थाओं को अपने कार्यों के प्रबंधन के अधिकार के संबंध में दिए गए तर्क को सुनते समय सर्वोच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की ।