झारखंड एवं बंगाल में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए मंदिरों में सामूहिक प्रार्थना कर देवताओं के चरणों में मन्नत मांगी !

सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ८४वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ।

साधको, शब्दशक्ति के माध्यम से संदेह फैलाने हेतु सक्रिय सातवें पाताल की बडी अनिष्ट शक्तियों की चाल पहचानकर साधना बढाओ !

वर्तमान में सातवें पाताल की बडी अनिष्ट शक्तियां साधकों की श्रद्धा को भंग कर उन्हें साधना से दूर करने के लिए ‘शब्दशक्ति’ के माध्यम से बडे स्तर पर सूक्ष्म युद्ध कर रही हैं ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के ‘इदं न मम ।’, इस लेखन का अध्यात्मशास्त्रीय विश्लेषण !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजीे की अहंरहित अवस्था के कारण उनके द्वारा ज्ञानकार्य का श्रेय साधकों को दिया जाना 

Sanatan Sanstha Press Meet : भारत की रक्षा हेतु मुंबई में १७ मई को ‘ श्री राजमातंगी महायज्ञ ’ !

संपूर्ण विश्व पर वर्तमान में तृतीय विश्वयुद्ध के काले बादल मंडरा रहे हैं । ऐसी स्थिति में केवल राजनीतिक अथवा बौद्धिक स्तर के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं । राष्ट्र को आध्यात्मिक अधिष्ठान की महती आवश्यकता है ।

सनातन के ज्ञान प्राप्त करनेवाले साधकों की भांति सूक्ष्म से ज्ञान प्राप्त करनेवाले साधक पृथ्वी पर अत्यल्प होने के कारण

‘‘कु. मधुरा भोसले, श्री. निषाद देशमुख और श्री. राम होनप जैसे सनातन के ज्ञान प्राप्त करनेवाले साधकों की भांति सूक्ष्म से ज्ञान प्राप्त करनेवाले साधक पृथ्वी पर कितने हैं ? यदि उनकी संख्या विशेष नहीं है, तो उसके क्या कारण हैं ?’’

कर्मयोग, ज्ञानयोग एवं भक्तियोग के क्रम में हुई परम पूज्य डॉक्टरजी की आध्यात्मिक यात्रा

‘मैंने वर्ष १९८२ तक सम्मोहन उपचार विशेषज्ञ के रूप में व्यवसाय और शोध किया । वर्ष १९८३ से १९८६ के दौरान विभिन्न संतों के पास जाने पर अध्यात्म, संत, यह सब सत्य है, इसका मुझे विश्वास हो गया ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ‘हिन्दू राष्ट्र आएगा’, केवल इतना कहते ही नहीं, अपितु उसे साकार करने के लिए भी प्रयत्नरत !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीे ने वर्ष २०१२ में केवल हिन्दू राष्ट्र के विषय में ही नहीं बताया, अपितु ‘उसके लिए क्या प्रयास करने चाहिए ?’ यह भी बताया और वे इसके लिए प्रयास भी करवा रहे हैं :

दसवीं की परीक्षा में बिहार के युवा साधकों को मिली सफलता

सभी युवा साधक युवा साधना सत्संग में जुडते हैं और व्यष्टि एवं समष्टि साधना करते हैं । सभी ने इस सफलता का श्रेय सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी के चरणों में अर्पित किया ।

साधको, शब्दशक्ति के माध्यम से संदेह फैलाने हेतु सक्रिय सातवें पाताल की बडी अनिष्ट शक्तियों की चाल पहचानकर साधना बढाएं !

यदि सनातन संस्था तथा उसके संतों और साधकों के विषय में कोई आपत्तिजनक लेखन अथवा वक्तव्य करता हुआ दिखाई दे, तो इसकी जानकारी अपने क्षेत्र के उत्तरदायी धर्मप्रचारक संतों को दें ।