साधको, शब्दशक्ति के माध्यम से संदेह फैलाने हेतु सक्रिय सातवें पाताल की बडी अनिष्ट शक्तियों की चाल पहचानकर साधना बढाओ !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले

वर्तमान में सातवें पाताल की बडी अनिष्ट शक्तियां साधकों की श्रद्धा को भंग कर उन्हें साधना से दूर करने के लिए ‘शब्दशक्ति’ के माध्यम से बडे स्तर पर सूक्ष्म युद्ध कर रही हैं । लिखित और वाणी में प्रयुक्त शब्दों के माध्यम से संस्था, संत एवं साधकों के विषय में नकारात्मकता फैलाने की घटनाएं हो रही हैं । इस सूक्ष्म युद्ध में अनिष्ट शक्तियां समाज के विरोधियों तथा नकारात्मक विचारों से प्रभावित साधकों को माध्यम बनाकर उनके लेखन एवं वाणी के द्वारा अन्य साधकों के मन में संदेह उत्पन्न करने का कार्य कर रही हैं । साधक की श्रद्धा पर आघात किया जाए, तो उसके मन में संदेह उत्पन्न होता है और उसकी साधना में अधोगति होती है ।

साधको, शब्दशक्ति के माध्यम से संदेह फैलानेवाली सातवें पाताल की इन अनिष्ट शक्तियों के षड्यंत्र का शिकार न बनते हुए उत्साहपूर्वक अपनी साधना बढाएं !

– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले (२८.३.२०२६)

यदि सनातन संस्था तथा उसके संतों और साधकों के विषय में कोई आपत्तिजनक लेखन अथवा वक्तव्य करता हुआ दिखाई दे, तो इसकी जानकारी अपने क्षेत्र के उत्तरदायी धर्मप्रचारक संतों को दें । – न्यासी, सनातन संस्था    
  • बुरी शक्ति : वातावरण में अच्छी तथा बुरी (अनिष्ट) शक्तियां कार्यरत रहती हैं । अच्छे कार्य में अच्छी शक्तियां मानव की सहायता करती हैं, जबकि अनिष्ट शक्तियां मानव को कष्ट देती हैं । प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों के यज्ञों में राक्षसों ने विघ्न डाले, ऐसी अनेक कथाएं वेद-पुराणों में हैं । ‘अथर्ववेद में अनेक स्थानों पर अनिष्ट शक्तियां, उदा. असुर, राक्षस, पिशाच को प्रतिबंधित करने हेतु मंत्र दिए हैं ।’ अनिष्ट शक्तियों से हो रही पीडा के निवारणार्थ विविध आध्यात्मिक उपचार वेदादि धर्मग्रंथों में वर्णित हैं ।
  • सूक्ष्म : व्यक्ति के स्थूल अर्थात प्रत्यक्ष दिखनेवाले अवयव नाक, कान, नेत्र, जीभ एवं त्वचा, ये पंचज्ञानेंद्रिय हैैं । जो स्थूल पंचज्ञानेंद्रिय, मन एवं बुद्धि के परे है, वह ‘सूक्ष्म’ है । इसके अस्तित्व का ज्ञान साधना करनेवाले को होता है । इस ‘सूक्ष्म’ ज्ञान के विषय में विविध धर्मग्रंथों में उल्लेख है ।