विश्वकल्याण के लिए सनातन धर्मराज्य (हिन्दू राष्ट्र) की स्थापना करने हेतु तथा साधकों को शीघ्र मोक्षप्राप्ति हो, इसके लिए अहर्निश कार्यरत रहनेवाली विभूति हैं सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ! उनकी साधनायात्रा, शिक्षाएं, विविधांगी कार्य, हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हेतु वे कर रहे सूक्ष्म स्तर का संघर्ष, उनकी देह की दैवी विशेषताएं, प्राचीन नाडी-पट्टिकाओं में वर्णित उनकी महिमा आदि को समाहित करनेवाला यह ग्रंथ उनके अवतारी विभूतित्व का परिचय कराता है । आनंदमय जीवन के लिए साधना, साथ ही राष्ट्र एवं धर्मकार्य करने हेतु प्रेरणा एवं दिशा प्रदान करनेवाला यह ग्रंथ एक चैतन्यमय प्रासादिक धरोहर ही है !
संकलनकर्ता : सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले एवं पू. संदीप गजानन आळशी
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यदि मुसलमान अपने पूर्वजों की परंपराओं को स्वीकार करें, तो उन्हें हिन्दू राष्ट्र में किसी प्रकार का कोई संकट नहीं होगा ! – Yogrishi Ramdev baba
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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