Gyanvapi : (और इनकी सुनिए ..) हमने बाबरी के विषय में संयम बरता, ज्ञानवापी विषय में रास्ते पर उतरकर लडेंगे ! – मौलाना तौकीर रजा

हिंदुत्वनिष्ठ के विरुद्ध कथित द्वेषयुक्त भाषण (हेट स्पीच) करने के प्रकरण में उठते-बैठते अपराध प्रविष्ट करनेवाली पुलिस को अब मौलाना तौकीर रजा का यह वक्तव्य द्वेषयुक्त नहीं लगता क्या ?

PM Modi Pannun Case : भारत विरोधी गतिविधियां कर अभिव्यक्ति स्वतंत्रता के नाम पर विदेश से हिंसा को प्रोत्साहन !

अमेरिका के खालिस्तानी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या के षड्‌यंत्र के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पहली बार वक्तव्य !

Covid Wave : पुन: एक बार कोरोना की लहर आने की आशंका !

केरल को छोड़कर सभी राज्‍यों में स्‍थिति सामान्‍य; लेकिन सतर्क रहना आवश्‍यक है ! – डॉ. अजित जैन

MP Suspended : अब तक विरोधी दलों के १४१ सांसद निलंबित !

संसार के सामने भारतीय लोकतंत्र का उपहास किए जाने का और एक उदाहरण ! सुरक्षा व्यवस्था की न्यूनताओं में सुधार करने के लिए एकत्रित प्रयत्न करना आवश्यक होते हुए भी इसपर राजनीति करना विरोधी दलों के सांसदों को लज्जास्पद !

NIA Raid : राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा ‘इस्लामिक स्टेट’ के १९ स्थानों पर छापेमारी  !

इतनी बडी मात्रा में ‘इस्लामिक स्टेट’ नामक आतंकवादी संगठन का जाल फैलने तक भारत के गुप्तचर तंत्र एवं सुरक्षातंत्र क्या कर रहे थे ?’, यदि सामान्य नागरिकों के मन में यह प्रश्न उठे, तो आश्‍चर्य कैसा !

Cancer Cases : देश में कर्करोग के रोगियों की संख्या में हो रही है वृद्धि ! – केंद्रीय स्वास्थ्यमंत्री

लोगों का मानना है कि सरकार को इसके कारणों का पता लगा कर उसका समाधान ढूंढना चाहिए !

लोकसभा में अशांति फैलाने‍वाले ३३, जबकि राज्यसभा में ४५ सांसद निलंबित !

इसमें विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी, द्रविड मुनेत्र कडगम (द्रविड प्रगति संघ) के टीआर बालू, दयानिधि मारन, तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय आदि सम्मिलित हैं ।

Dawood Ibrahim : दाऊद इब्राहिम पर कराची में अज्ञात व्यक्ति द्वारा विषप्रयोग !

चिकित्सालय में हो रहे हैं उपचार !
भारतीय तंत्रों द्वारा अब तक स्वीकृति नहीं !

Delhi Metro Death : देहली मेट्रो के दरवाजे में साडी फंसने से हुई दुर्घटना में महिला की मृत्यु !

घटना १४ दिसंबर की है। गंभीर रूप से घायल महिला को विविध अस्पतालों में ले जाने पर अंततः सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया गया; लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका ।

देश के न्यायालयों में ५ करोड से भी अधिक अभियोग प्रलंबित !

प्रलंबित अभियोगों की संख्या में प्रतिदिन वृद्धि ही हो रही है । इन्हें पूरा करने के लिए शासनकर्ता, न्यायप्रणाली और जनता को सामूहिक प्रयत्न करना आवश्यक है !