बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठियों से मुठभेड : १ सैनिक घायल
बंगाल की भारत-बांग्लादेश सीमा पर सीमा सुरक्षा दल एवं घुसपैठियों मे हुई मुठभेड में एक सैनिक घायल हो गया है । एक घुसपैठिए को बंदी बनाया गया है ।
बंगाल की भारत-बांग्लादेश सीमा पर सीमा सुरक्षा दल एवं घुसपैठियों मे हुई मुठभेड में एक सैनिक घायल हो गया है । एक घुसपैठिए को बंदी बनाया गया है ।
दिल्ली ही नहीं, अपितु संपूर्ण देश में यही स्थिति हो रही है । यदि अभी भी कुछ नहीं किया गया, तो कल भारत का पाकिस्तान एवं बांग्लादेश हुए बिना रहेगा नहीं ।
यह प्रश्न केंद्र के साथ ही देश के प्रत्येक राज्य से पूछना, आवश्यक हैं ! क्योंकि पिछले अनेक दशकों से भारत में घुसपैठ हो रही है तथा उन्हें नियंत्रित कर बाहर धकेलने के प्रयास बडी मात्रा में नहीं हो रहे । यह वस्तुस्थिति कष्टदायक है !
देश भर में तथा राज्य में १ करोड़ से ८० लाख तक की संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं, जो देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। उनमें अपराध और सभी प्रकार के जिहाद का प्रचलन बहुत अधिक है। उन्होंने रोजगार की समस्याएं पैदा कर दी हैं।
इससे घुसपैठियों के लिए भारत एक धर्मशाला सिद्ध हो गई है, यदि ऐसा कहा, तो वह चूक नहीं होगी । इस स्थिति को परिवर्तित करने हेतु ‘हिंदु राष्ट्र’ आवश्यक है !
बांग्लादेशी घुसपैैठिए मुसलमानों के कारण देश में अपराधिता में वृद्धि हो रही है । इतने वर्षां से कहा जाने पर भी इस बात को दुर्लक्षित करने का ही यह परिणाम है । क्या अब तो प्रत्येक बांग्लादेशी घुसपैैठिए को हकाला जाएगा ?
देश में जहां ५-६ करोड बांग्लादेशी घुसपैठिए होने का स्पष्ट होते हुए भी उन पर तीव्रता के साथ कार्यवाही क्यों नहीं की जाती ? बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत में प्रवेश दिलानेवाले, स्थानीय स्तर पर उनकी सहायता करनेवाले तथा उनके विरुद्ध किसी प्रकार की कार्यवाही न करनेवाले ऐसे सभी लोगों पर ही कार्यवाही की जानी चाहिए !
यह तृणमूल कांग्रेस सरकार को लज्जापद ! अगर बांग्लादेशी घुसपैठियों को सरकार से मदद मिल रही है तो ऐसे घुसपैठियों को कौन बाहर निकालेगा ?
बांग्लादेशी घुसपैठिए आतंकवादी गतिविधियों के साथ-साथ आपराधिक गतिविधियों के माध्यम से भारत में हिंदुओं पर अत्याचार कर रहे हैं। दूसरी ओर, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के जातीय वंशविच्छेद होने के लिए भी उन्होंने कमर कस ली है । यह स्थिति हिंदुओं के लिए शर्मनाक है!
घटनास्थल पर उपस्थित खाद्य निरीक्षक विजेता द्विवेदी की गाड़ी को तोड दिया गया। उनके ड्राइवर को गाड़ी से बाहर निकालकर जान से मारने के उद्देश्य से पीटा गया।