‘श्रीमन्नारायणस्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के आशीर्वाद से तथा श्री महालक्ष्मीस्वरूप श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी और श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी की उपस्थिति में मुंबई में श्री राजमातंगी महायज्ञ संपन्न हुआ ।

इसकी साक्षी थी यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात गुरुदेवजी के वास्तव्य स्थल रामनाथी (गोवा) स्थित सनातन के आश्रम परिसर में बादलों की गडगडाहट और बिजली की कडकडाहट के साथ हुई वर्षा ! ‘यदि यह वर्षा मुंबई के यज्ञस्थल पर हुई होती, तो यज्ञ में उपस्थित सभी लोगों के लिए अपने घर पहुंचना कठिन हो गया होता’, यह जानकर भगवान ने वर्षा की दिशा मोड दी । वर्षा के समय बादलों की गडगडाहट और बिजली की कडकडाहट, देवलोक में आनंद होने पर बजाए जानेवाले मंगल वाद्यों की अनुभूति है । यह देवताओं द्वारा यज्ञ स्वीकार किए जाने का संकेत है । देश की सुरक्षा के लिए किया गया यह यज्ञ, एक प्रकार से महामृत्युंजय यज्ञ ही था; क्योंकि इस यज्ञ के माध्यम से गुरुदेवजी ने आनेवाले युद्धकाल के लिए साधकों को आवश्यक मृत्युंजय कवच प्रदान किया और राष्ट्र को भी कवच प्रदान किया । मुंबई में ‘शंखनाद महोत्सव’ करने समान ही फल इस यज्ञ से प्राप्त हुआ है ।’
(पू. डॉ. ॐ उलगनाथन्जी द्वारा किया गया सप्तर्षि जीवनाडीवाचन, १८.५.२०२६)

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