
वर्तमान में सातवें पाताल की बडी अनिष्ट शक्तियां साधकों की श्रद्धा को भंग कर उन्हें साधना से दूर करने के लिए ‘शब्दशक्ति’ के माध्यम से बडे स्तर पर सूक्ष्म युद्ध कर रही हैं । लिखित और वाणी में प्रयुक्त शब्दों के माध्यम से संस्था, संत एवं साधकों के विषय में नकारात्मकता फैलाने की घटनाएं हो रही हैं । इस सूक्ष्म युद्ध में अनिष्ट शक्तियां समाज के विरोधियों तथा नकारात्मक विचारों से प्रभावित साधकों को माध्यम बनाकर उनके लेखन एवं वाणी के द्वारा अन्य साधकों के मन में संदेह उत्पन्न करने का कार्य कर रही हैं । साधक की श्रद्धा पर आघात किया जाए, तो उसके मन में संदेह उत्पन्न होता है और उसकी साधना में अधोगति होती है ।
साधको, शब्दशक्ति के माध्यम से संदेह फैलानेवाली सातवें पाताल की इन अनिष्ट शक्तियों के षड्यंत्र का शिकार न बनते हुए उत्साहपूर्वक अपनी साधना बढाएं !
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले (२८.३.२०२६)
यदि सनातन संस्था, उसके संतों और साधकों के विषय में कोई आपत्तिजनक लेखन अथवा वक्तव्य करता हुआ दिखाई दे, तो इसकी जानकारी अपने क्षेत्र के उत्तरदायी धर्मप्रचारक संतों को दें । – न्यासी, सनातन संस्था.
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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